💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
दिनांक 26/05/2023 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दशरथ प्रसाद अगरिया जी का बिलासपुर जाना हुआ जहाँ वापसी के दौरान संगठन डायरेक्टर श्री रामखिलावन अगरिया जी कोरबा निवासी के साथ मिलकर जिला कोरबा के संगठन के प्रमुख कार्यकर्त्ता साथियों से मिल कर संगठन के गतिविधियों को आगे बढ़ाने की चर्चा की पहल की गयी ll जहाँ बारी बारी से जिला कोरबा के कुछ प्रमुख कार्यकर्ता जो संगठन मे बीते कुछ दिनों से शून्य अवस्था मे रहे हैं घर पर जाकर बारी बारी से मिला गया ll संगठन की ओर से जिला कोरबा के प्रमुख कार्यकर्त्ता के रूप मे नियुक्त कार्यकर्त्ता ग्राम नुनेरा से श्री सुदर्शन अगरिया जी से उनके ग्राम जाकर संपर्क किया गया जहाँ संगठन के गतिविधि को आगे बढ़ाने एवं समाज के उत्थान विकास मे समाज के प्रति जिम्मेदारी लेने की बात बोला गया ll इसके पश्चात ग्राम झाबर मे श्री उमेंद सिंह अगरिया जी एवं उनके पूरे परिवार से मुलाक़ात किया गया जहाँ संगठन के गतिविधि को आगे बढ़ाने एवं शिक्षा, सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा उनके पूरे परिवार के साथ हुआ ll इसके पश्चात ग्राम सालिहा पार...