अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
दिनांक 26/05/2023 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दशरथ प्रसाद अगरिया जी का बिलासपुर जाना हुआ जहाँ वापसी के दौरान संगठन डायरेक्टर श्री रामखिलावन अगरिया जी कोरबा निवासी के साथ मिलकर जिला कोरबा के संगठन के प्रमुख कार्यकर्त्ता साथियों से मिल कर संगठन के गतिविधियों को आगे बढ़ाने की चर्चा की पहल की गयी ll जहाँ बारी बारी से जिला कोरबा के कुछ प्रमुख कार्यकर्ता जो संगठन मे बीते कुछ दिनों से शून्य अवस्था मे रहे हैं घर पर जाकर बारी बारी से मिला गया ll संगठन की ओर से जिला कोरबा के प्रमुख कार्यकर्त्ता के रूप मे नियुक्त कार्यकर्त्ता ग्राम नुनेरा से श्री सुदर्शन अगरिया जी से उनके ग्राम जाकर संपर्क किया गया जहाँ संगठन के गतिविधि को आगे बढ़ाने एवं समाज के उत्थान विकास मे समाज के प्रति जिम्मेदारी लेने की बात बोला गया ll इसके पश्चात ग्राम झाबर मे श्री उमेंद सिंह अगरिया जी एवं उनके पूरे परिवार से मुलाक़ात किया गया जहाँ संगठन के गतिविधि को आगे बढ़ाने एवं शिक्षा, सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा उनके पूरे परिवार के साथ हुआ ll इसके पश्चात ग्राम सालिहा पार...