💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के मार्गदर्शन मे ज़िला बलरामपुर छत्तीसगढ़ मे जिलास्तर की सामाजिक मीटिंग एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम सामाजिक विकास हेतु संपन्न हुआ ll राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के एजेंडा एवं शपथ ग्रहण पत्र के अनुसार अगरिया समाज के जमीनी स्तर के विकास के लिए भारत अंतर्गत सभी जिलों मे जहाँ संगठन की समिति बनी हुई मार्च 2022 के महीने मे सभी जिलों मे समाज के हर व्यक्ति को संगठन के उद्देश्य एवं संगठन की जानकारी तथा समाज के जमीनी स्तर के विकास के लिए स्थानीय ज़िला स्तरीय मीटिंग एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया था जहाँ कई जिलों मे ये कार्यक्रम हुआ और हो भी रहे है ये सारे कार्यक्रम अन्य जिलों से नियुक्त नोडल कार्यकर्त्ता अधिकारी की उपस्थिति मे संपन्न हुआ है ll अतः उसी के परिप्रेक्ष्य मे ज़िला बलरामपुर छत्तीसगढ़ मे दिनांक 20/03/2022 को नोडल कार्यकर्त्ता अधिकारी माननीय सुकुल प्रसाद नागवंशी एवं सुखित लाल अगरिया जी की उपस्थिति मे संपन्न हुआ ll नोडल अधिकारि महोदय श्री सुकुल नागवंशी जी एवं आदरणी...