अगरिया जनजाति : हमारी संस्कृति, हमारी विरासत, हमारा गौरव अगरिया जनजाति भारत की महत्वपूर्ण आदिवासी समुदायों में से एक है। मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सरकारी सूची में अगरिया (Agariya) का नाम शामिल है। अगरिया समाज की पहचान उसकी समृद्ध सामाजिक परंपराओं, प्रकृति से जुड़े जीवन-मूल्यों, लोक संस्कृति और विशेष रूप से पारंपरिक लौह-प्रगलन की विरासत से जुड़ी रही है। पीढ़ियों से लौह अयस्क से लोहे के निर्माण की पारंपरिक जानकारी अगरिया समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। लौह प्रगलन : अगरिया समाज की गौरवशाली विरासत अगरिया समुदाय की सबसे विशिष्ट पहचान उसकी पारंपरिक लौह-प्रगलन परंपरा है। प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय ज्ञान और पीढ़ियों से विकसित तकनीकी समझ के आधार पर लौह अयस्क से उपयोगी लोहा तैयार करने की परंपरा ने अगरिया समाज को एक विशिष्ट पहचान दी। यह केवल लोहे के निर्माण की तकनीक नहीं थी, बल्कि इसमें स्थानीय ज्ञान, प्रकृति की समझ, श्रम, कौशल और सामुदायिक परंपरा का समन्वय दिखाई देता है। इसी गौरवशाली विरासत को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अगरि...
अगरिया आदिवासी अगरिया शब्द का अभिप्राय संभवतः आग पर काम करने वाले लोगो से है। अथवा आदिवासियों के देवता ,आज्ञासुर से ,जिनका जन्म लौ से हुआ माना जाता है। अगरिया मध्यभारत के लोहा पिघलाने वाले और लोहारी करने वाले लोग है जो अधिकतर मैकाल पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाते है। लेकिन अगरिया क्षेत्र को डिंडोरी से लेकर नेतरहाट तक रेखांकित किया जा सकता है , गोंड बैगा और अन्य आदिवासियों से मिलते जुलते रिवाजो और आदतों के कारन अगरिया की जीवन शैली पर बहुत कम अध्यन किया है। हलाकि उनके पास अपनी एक विकसित टोटमी सभ्यता है और मिथको का भंडार है जो उन्हें भौतिक सभ्यता से बचाकर रखता है। और उन्हें जीवनशक्ति देता है। अगरिया लोग ,बैगाओं तथा अपने आसपास की आदतों को बराबरी से अपनाते है जो उनके जीवन शैली के अनुरूप होते है। इसका उल्लेख आपको द बैगा पुस्तक जायगा। कभी तो यह भी कहा जाता है की अगरिया बैगा जनजाति के पूरक है। बैगा किताब में नृत्य के अध्याय को मंडला के अगरियों के लिए भी यथावत लागू किया जा सकता है। गोंड के लिए निर्धारित किनशिप नियम ,वर्जनाय...