अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया महासंघ का राष्ट्रीय बैठक ऑनलाइन मोबाइल के माध्यम से संपन्न हुआ ll राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत संचालक दशरथ अगरिया जी के द्वारा दिनांक -29/10/2022 दिन शनिवार को ऑनलइन मोबाइल के माध्यम से अगरिया समाज के उत्थान एवं विकास हेतु बैठक का आयोजन किया गया जहा पूरे राष्ट्रीय स्तर से कई राज्यों के स्वजातीय बंधु एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति मे बैठक संपन्न हुआ ll बैठक मे जहा सम्पूर्ण भारत स्तर पर अगरिया समाज को एक मंच पर संगठित होने, समाज मे व्याप्त कुरीतियों को दूर करने समाज मे बालक /बालिकाओ को शिक्षित करने तथा समाज मे नशा पान को प्रतिबंधित करने पर सन्देश दिया गया ll समाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा अगरिया अस्तित्व हेतु समाज की संस्कृति रीति रीवाज को जीवित रखने को कहा गया ll क्योंकि अगरिया जनजाति प्राचीन काल की वो जनजाति है जिसने सर्वप्रथम लौह अयस्क(लौह पत्थर ) से लोहे का निर्माण किया ll आज अगरिया जनजाति विलुप्त होते हुए प्रतिभावान समाज को समाज मे मुख्य पहचान दिलाने के लिए अगरिया समाज संगठन भारत सतत प्रयास रत ...