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अगरिया जनजाति गौरव दिवस (हमारे विरासत, हमारे विरासत हमारे इतिहास का दिन)

💥अगरिया जनजाति गौरव दिवस💥 ❤️‍🔥केवल एक कार्यक्रम नहीं, अगरिया जनजाति के सम्मान, विरासत और पहचान का उत्सव❤️‍🔥 हर वर्ष 15 नवंबर को कोतमा में मनाया जाने वाला “अगरिया जनजाति गौरव दिवस” अगरिया समाज के लिए केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं है, बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। अगरिया जनजाति का इतिहास अपनी मेहनत, परंपरा और लौह-कर्म की विशिष्ट विरासत से जुड़ा हुआ है। पीढ़ियों से हमारे पूर्वजों ने आग, मिट्टी, पत्थर और लौह अयस्क के साथ अपने पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल का उपयोग करते हुए लौह निर्माण की परंपरा को जीवित रखा। यह केवल एक पेशा नहीं था, बल्कि हमारे पूर्वजों की तकनीकी समझ, प्रकृति के साथ उनका संबंध और उनकी मेहनत की पहचान थी। इसी गौरवशाली विरासत को सम्मान देने और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से अगरिया जनजाति गौरव दिवस का आयोजन किया जाता है। 🔥 गौरव दिवस का उद्देश्य🎊💥 इस दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि अगरिया समाज अपनी पहचान को जाने, अपनी संस्कृति ...

राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी) राजा लौहगुंडी:-अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक

💥   राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के  नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...

💥आयुष्मान भारत कार्ड: 2026 में पात्रता और अप्लाई करने का तरीका💥

💥आयुष्मान भारत कार्ड: 2026 में पात्रता और अप्लाई करने का तरीका💥 2026 में आयुष्मान भारत कार्ड बनवाना और भी आसान हो गया है, और इसमें सबसे बड़ा बदलाव यही है। अब 70 साल और उससे ऊपर के सभी बुजुर्गों के लिए ये कार्ड फ्री है, चाहे उनकी आय कितनी भी हो। इसके लिए अलग से Ayushman Vay Vandana Card बनता है, जिसमें परिवार के 5 लाख के अलावा बुजुर्ग को अलग से 5 लाख तक का टॉप-अप कवर मिलता है। बाकी लोगों के लिए पात्रता पहले की तरह ही है: ग्रामीण क्षेत्र में अगर आपका परिवार SECC 2011 या NFSA राशन कार्ड लिस्ट में है, जैसे कच्चे मकान में रहने वाले, भूमिहीन मजदूर, SC/ST परिवार, तो आप पात्र हैं। शहरी क्षेत्र में रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर, ड्राइवर, कंस्ट्रक्शन वर्कर जैसे असंगठित क्षेत्र के कामगार पात्र हैं। 👉अप्लाई करने का सबसे आसान तरीका: 1 .  beneficiary.nha.gov.in पोर्टल पर जाएं और Beneficiary के तौर पर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। अपना राज्य, जिला और PMJAY सेलेक्ट करके आधार नंबर या राशन कार्ड / फैमिली ID से सर्च करें।  2. लिस्ट में नाम आने पर Do e-KYC पर क्लिक करें। आधार...

अगरिया जनजाति मे उड़द की दाल का क्या महत्व है ll

अगरिया जनजाति में उड़द की दाल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि कई सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि) में रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से इसका महत्व निम्न प्रकार से देखा जाता है। 🌾 शुभ कार्यों में उपयोग🌾 उड़द की दाल का प्रयोग कई मांगलिक अवसरों पर किया जाता है, जैसे: विवाह संस्कार अगरिया जनजाति में उड़द की दाल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि कई सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि) में रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से इसका महत्व निम्न प्रकार से देखा जाता है। 1. शुभ कार्यों में उपयोग उड़द की दाल का प्रयोग कई मांगलिक अवसरों पर किया जाता है, जैसे: विवाह संस्कार देव-पूजन कुलदेवता एवं ग्राम देवता की पूजा फसल या नए अनाज से जुड़े अनुष्ठान इसे समृद्धि, अन्न और शुभता का प्रतीक माना जाता है। 2. पूर्वज एवं कुलदेवता क...

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन मध्यप्रदेश। जवाहर नवोदय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक माता-पिता एवं अभिभावक अपने बच्चों का आवेदन निर्धारित तिथि के भीतर कर सकते हैं। नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के माध्यम से योग्य विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। 💥कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा हेतु पात्रता एवं आवश्यक शर्तें💥 1-बालक एवं बालिका दोनों आवेदन कर सकते हैं। 2-अभ्यर्थी का जन्म 01 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 के बीच होना चाहिए। 3-अभ्यर्थी वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा-5 में अध्ययनरत होना चाहिए। 4-सभी वर्गों (सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। 📓आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज📓 ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी— ✅ अभ्यर्थी की पासपोर्ट साइज फोटो ✅ माता या पिता के हस्ताक्षर ✅ अभ्यर्थी के स्वयं के हस्ताक्षर ✅ यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचि...

अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं

अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह प्रगलक (Iron Smelter) जनजाति है, जिसकी संस्कृति प्रकृति, पूर्वजों, देवी-देवताओं और पारंपरिक जीवन पद्धति से जुड़ी हुई है। अगरिया समाज में त्यौहार केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति पूजा, कृषि, पूर्वजों के सम्मान और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम होते हैं। 1. 🚩 लोहासुर पूजा (Lohasur Puja) अगरिया समाज में लोहासुर देव का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन क्या करते हैं: लोहासुर देव की पूजा-अर्चना करते हैं। पारंपरिक लौह कला और अपने पूर्वजों को याद करते हैं। समाज की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं। परिवार एवं समाज के लोग एकत्र होकर पूजा और सामूहिक कार्यक्रम करते हैं। 2. 🌿 अंगारमोती माता पूजा अगरिया समाज में अंगारमोती माता को शक्ति और संरक्षण की देवी के रूप में श्रद्धा दी जाती है। परंपराएं: माता की पूजा की जाती है। घर-परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं विशेष रूप से पूजा में भाग लेती हैं। पारंपरिक गीत और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। 3. 🌾 नवाखानी / नवा खाई (नई फसल...

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्पसीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026।(लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन)

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्प सीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में जिला सीधी के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज जिला विकास अभियान का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री अमरशाह अगरिया तथा उनकी पूरी जिला टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा एवं कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, नशामुक्त, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना तथा फाउंडेशन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना रहा। कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 🌻समाज को संगठित करने पर विशेष जोर🌻 बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे प्रत्येक गांव में जाकर अधिक से अधिक परिवारों को फाउंडेशन से जोड़ें तथा समाज क...

अगरिया जनजाति मे धुर्वे गोत्र, परम्परा, इतिहास, संस्कृति 💥

💥 अगरिया जनजाति मे धुर्वे गोत्र, परम्परा, इतिहास💥 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌴🌴🌴🌴 अगरिया जनजाति में धुर्वे (धुर्वा/धुर्वे) गोत्र एक महत्वपूर्ण गोत्र माना जाता है। हालांकि अगरिया जनजाति के सभी गोत्रों का लिखित इतिहास बहुत कम उपलब्ध है और अधिकांश जानकारी लोकपरंपराओं, मौखिक इतिहास तथा मध्य भारत की आदिवासी सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। इसलिए धुर्वे गोत्र के संबंध में उपलब्ध जानकारी को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकविश्वासों के आधार पर समझना चाहिए। 👉 धुर्वे गोत्र का परिचय🌱 धुर्वे गोत्र मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ आदिवासी समुदायों में पाया जाता है। अगरिया जनजाति में भी धुर्वे गोत्र के परिवार मिलते हैं। 👉 "धुर्वे" शब्द की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न मत हैं—💥 💥 ध्रुव (स्थिरता) से संबंध :– कुछ विद्वान धुर्वे शब्द को संस्कृत के "ध्रुव" शब्द से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ अटल, स्थिर या दृढ़ होता है। 🌴 वनस्पति या प्राकृतिक प्रतीक से संबंध :– आदिवासी परंपराओं में कई गोत्र किसी वृक्ष, पशु, पक्षी या प्राकृतिक तत्व प...

अगरिया जनजाति का पोर्ते (Porte) गोत्र – उत्पत्ति, इतिहास, टोटम एवं सामाजिक महत्व

अगरिया जनजाति का पोर्ते (Porte) गोत्र – उत्पत्ति, इतिहास, टोटम एवं सामाजिक महत्व 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 अगरिया जनजाति में पोर्ते (Porte) एक प्रतिष्ठित और प्राचीन गोत्र माना जाता है। यह गोत्र विशेष रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। पोर्ते गोत्र के लोग अपने सामाजिक अनुशासन, प्रकृति-पूजा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए जाने जाते हैं। ध्यान दें: अगरिया जनजाति की गोत्र परंपराएँ मुख्यतः मौखिक परंपरा पर आधारित हैं। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में इनके बारे में अलग-अलग मान्यताएँ मिल सकती हैं। 1. पोर्ते गोत्र की उत्पत्ति "पोर्ते" शब्द की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न स्थानीय मान्यताएँ प्रचलित हैं। कुछ बुजुर्गों के अनुसार "पोर्ते" शब्द का संबंध किसी प्राचीन कुल-पुरुष या वीर पूर्वज से माना जाता है। कुछ स्थानों पर इसे जंगल और प्रकृति से जुड़े एक पारंपरिक कुल का नाम माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार यह गोत्र उन परिवारों से विकसित हुआ जो लौह प्रगलन (Iron Smelting) कार्य में दक्ष थे और ...

अगरिया जनजाति का चिरई गोत्र : इतिहास, उत्पत्ति, टोटम परंपरा और सांस्कृतिक महत्व

अगरिया जनजाति का चिरई गोत्र : इतिहास, उत्पत्ति, टोटम परंपरा और सांस्कृतिक महत्व 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह-प्रगलक (Iron Smelter) जनजातियों में से एक है। इस जनजाति की पहचान केवल पारंपरिक लौह शिल्प से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध सामाजिक व्यवस्था, गोत्र प्रणाली, प्रकृति-पूजा और सांस्कृतिक विरासत से भी होती है। अगरिया समाज में गोत्र केवल एक पारिवारिक पहचान नहीं है, बल्कि यह पूर्वजों, प्रकृति, सामाजिक अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। इन्हीं प्रमुख गोत्रों में चिरई गोत्र का विशेष स्थान माना जाता है। यह गोत्र पक्षियों के प्रति सम्मान, प्रकृति संरक्षण और टोटम परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। महत्वपूर्ण सूचना: चिरई गोत्र के बारे में उपलब्ध अधिकांश जानकारी लोकपरंपराओं, मौखिक इतिहास और समाज के बुजुर्गों द्वारा संरक्षित परंपराओं पर आधारित है। इसके विस्तृत ऐतिहासिक अभिलेख अभी सीमित हैं, इसलिए जहाँ लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ जानकारी को लोकमान्यता के रूप में समझा जाना चाहिए। 🌴गोत्र क्या होता है?🌴 गोत्र किसी परिवार ...

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन ll दिनांक - 6 जुलाई 2026

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन सिंगरौली (मध्यप्रदेश)। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के तत्वावधान में 06 जुलाई 2026 को जिला सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में "अगरिया समाज जिला विकास अभियान" का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार अगरिया एवं उनकी पूरी टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्तियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं नशामुक्त बनाने के साथ-साथ समाज की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का संरक्षण करना था। बैठक में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 📌 समाज के विकास के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखि...

अगरिया जनजाति का नागवंशी (नाग) गोत्र : इतिहास, परंपरा, टोटम और सामाजिक महत्व💥

🐍 अगरिया जनजाति का नागवंशी (नाग) गोत्र : इतिहास, परंपरा, टोटम और सामाजिक महत्व💥 👇 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 ❤️💥💥🌱💥 अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह-प्रगलक (Iron Smelter) आदिम जनजातियों में से एक है, जिसने सदियों तक प्राकृतिक लौह अयस्क से लोहा गलाकर कृषि, शिकार और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक औजारों का निर्माण किया। इस समाज की पहचान केवल उसकी लौह-कला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी समृद्ध गोत्र व्यवस्था, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक अनुशासन भी इसकी विशिष्ट पहचान हैं। अगरिया समाज में अनेक प्राकृतिक एवं टोटम आधारित गोत्र पाए जाते हैं। इन्हीं में नागवंशी (नाग) गोत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्राचीन और सम्मानित गोत्र माना जाता है। यह गोत्र नाग (सर्प) को अपने कुल-प्रतीक (टोटम) के रूप में मानता है और प्रकृति संरक्षण की आदिवासी परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। 👉 नागवंशी गोत्र का अर्थ:- "नागवंशी" शब्द दो भागों से मिलकर बना है— •नाग अर्थात सर्प। •वंशी अर्थात वंश या कुल से संबंधित। आदिवासी परंपराओं में इसका अर्थ यह नहीं होता क...

मरावी गोत्र (अगरिया जनजाति मे मरावी गोत्र)

अगरिया जनजाति भारत की एक अत्यंत प्राचीन, पारम्परिक और गौरवशाली लौह-शिल्पी (लोहा गलाने और औजार बनाने वाली) आदिम जनजाति है। अगरिया समाज की सामाजिक संरचना और उसकी गोत्र व्यवस्था बेहद समृद्ध और प्रकृति से जुड़ी हुई है। इस समाज में लगभग 89 प्राकृतिक या प्रकृति-आधारित गोत्र माने जाते हैं, जिनमें से मरावी (Maravi) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित गोत्र है। ​मरावी गोत्र का अर्थ और प्राकृतिक प्रतीक ​आदिवासी समाज में गोत्रों का नामकरण और उनकी संरचना प्रकृति (पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, नदियाँ या जीव-जंतुओं) के आधार पर होती है। ​ शाब्दिक अर्थ: गोंडी और आदिम सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार, गोत्रों के अंत में आने वाले अक्षरों का अपना एक विशेष प्राकृतिक संकेत होता है। मरावी शब्द की उत्पत्ति भी इसी प्राकृतिक जुड़ाव से है, जो मुख्य रूप से वनस्पति, लता (वेली) या किसी विशिष्ट प्राकृतिक टोटम (प्रतीक) को दर्शाता है। ​ टोटम (प्रतीक) के प्रति श्रद्धा: मरावी गोत्र के लोग अपने पारंपरिक प्राकृतिक प्रतीक (टोटम) को बेहद पवित्र मानते हैं। इस गोत्र के नियमों के अनुसार, अपने प्रतीक जीव या वनस्पति को ...

उमरिया के ग्राम बाँधा में दिनांक -28.06.2026 को अगरिया समाज जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: फाउंडेशन मे जिला कार्यकर्ताओ की सक्रिय भागीदारी एवं समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया गया संकल्प (लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे)

उमरिया के ग्राम बाँधा में अगरिया समाज जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: फाउंडेशन मे जिला कार्यकर्ताओ की सक्रिय भागीदारी एवं समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया गया संकल्प उमरिया (मध्यप्रदेश) | 28 जून 2026 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में 28 जून 2026 को मध्यप्रदेश के जिला उमरिया अंतर्गत ग्राम बाँधा में अगरिया समाज जिला विकास अभियान का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला सचिव एवं संस्था के कोर डायरेक्टर (सदस्य) श्री विजय कुमार अगरिया एवं टेकराम अगरिया तथा उनकी समर्पित टीम के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के स्वजातीय बंधु, महिला शक्ति, युवा कार्यकर्ता एवं सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना था। समाज के विकास के लिए हुई विस्तृत चर्चा बैठक में फाउंडेशन की आगामी योजनाओं एवं समाज हित से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर विचार-वि...