अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
ज़िला कोरिया छ्ग ग्राम - बर्दिया मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम 2025 सम्पन्न लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे
ज़िला इकाई कोरिया छत्तीसगढ़ मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम 2025 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे दिनांक - 01/06/2025 दिन रविवार को 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 दिनांक 01/06/2025 को ज़िला कोरिया छत्तीसगढ़ के ग्राम - बर्दिया मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम सत्र -2025 का संपन्न हुआ ll अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष फाउंडेशन से जुड़े सभी जिलों मे माह - मार्च से अप्रैल माह मे संपन्न होता है, लेकिन यदि किन्ही कारण वश कोई ज़िला इस कार्यक्रम को निर्धारित माहऐ सम्पन्न नहीं करा पाता है तो उसे ज़िला वासी मई -जून माह मे भी सम्पन्न करा सकते है ll फाउंडेशन संस्थापक / मैनेजिंग डायरेक्टर DASHRATH PRASAD AGARIYA जी का कहना है अगरिया जोड़ो अभियान कार्यक्रम लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुहीम आंदोलन है जिसका उद्देश्य जिलों जिलों के अगरिया जनजाति समाज को लौह