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राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी) राजा लौहगुंडी:-अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक

💥   राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के  नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...

अगरिया जनजाति उत्थान विकास कार्यक्रम जिला इकाई रायगढ़ मे सम्पन्न ll कार्यक्रम मे फाउंडेशन के कोर कार्यकर्त्ता एवं अन्य जिलों के जिलाध्यक्ष पहुचे (लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन)

दिनांक 19/05/2024 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे जिला इकाई रायगढ़ छत्तीसगढ़ ग्राम चिरईपानी मे अगरिया जनजाति उत्थान विकास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ll जहाँ फाउंडेशन के कोर सदस्य एवं अन्य जिलों के जिलाध्यक्ष भी कार्यक्रम मे पंहुचे ll कार्यक्रम का उद्देश्य अगरिया जनजाति को संगठित करना एवं लौह प्रगलक अगरिया भारत फाउंडेशन की ओर से चलाये जा रहे समस्त मुहीम से अगरिया जन समुदाय को अवगत कराना रहा है लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की ओर से आज अगरिया जनजाति समाज के उत्थान एवं विकास के लिए सम्पूर्ण भारत मे मुहीम चलाई जा रही है एवं अगरिया जनजाति समाज को एक मंच मे संगठित करने का मुहीम जारी है ll फाउंडेशन अगरिया जनजाति समाज के संरक्षण एवं अगरिया जनजाति समाज की वैज्ञानिक संस्कृति को लेकर काफी सकारात्मक है ll क्योंकि आज अगरिया जनजाति एक ऐसी जनजाति है जिसका नाम पहचान एवं इसकी वैज्ञानिक संस्कृति विलुप्त के कगार पर रहा है ll लोग अगरिया जनजाति के कार्यो को देखकर लोहार नाम से सम्बोधित करते थे जबकि अगरिया जनजाति और लोहार दोनों अलग है ll साथ मे समाज मे भी अगरिया जनजाति क...