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लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के संस्थापक कौन है ll

लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के संस्थापक श्री दशरथ प्रसाद अगरिया है ll जो ज़िला अनूपपुर मध्यप्रदेश से है ll

अगरिया समुदाय

अगरिया आदिवासी के बारे मे ll 👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽 यह तस्वीर अगरिया समुदाय के पारम्परिक तरीके से लोहा गलाने की प्रक्रिया को दर्शाती है। इसमें एक मिट्टी और पत्थर से बना भट्ठा है, जिसमें जलता हुआ कोयला और चमकता हुआ पिघला हुआ लोहा दिखाई दे रहा है। चार लोग इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं—एक महिला धौंकनी (bellows) चला रही है, एक व्यक्ति पिघले हुए लोहे को छड़ से नियंत्रित कर रहा है, और अन्य लोग प्रक्रिया को देख रहे हैं। उनके कपड़े पारंपरिक और रंगीन हैं, जो ग्रामीण परिवेश को जीवंत बनाते हैं। अगरिया जनजाति का इतिहास यही है जो पूर्व काल मे जंगल मे निवास करते करते अपने जीवन यापन के लिए लौह अयस्क (लौह पत्थर) से अपने पारम्परिक पद्धति से कोठी और भट्ठी से लोहा बनाया ll इस दुनिया मे सबसे पहले लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म देने वाली जनजाति अगरिया जनजाति है ll आज इस संस्कृति को अपना कर कई कंपनी लोहा का उत्पादन कर रहे है ll अगरिया जनजाति आज के इस आधुनिक समाज मे भी एक पिछड़ा हुआ आदिवासी समाज है ll मध्यप्रदेश शासन एवं भारत सरकार को अगरिया जनजाति समाज को बेहतर स्थिति मे लाने के ल...

विधायक पंडरिया को ज़िला इकाई कबीरधाम छ.ग की टीम ने ज्ञापन सौपा ll अगरिया जनजाति की समस्याओ को लेकर ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन

आज दिनांक 05/01/2025 को ज़िला इकाई कबीरधाम छत्तीसगढ़ लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की टीम ने ज़िला कबीरधाम छत्तीसगढ़ के ब्लॉक पंडरिया विद्यायक माननीय श्री मति भावना बोहरा जी को ज्ञापन सौपे  अगरिया जनजाति की समस्याओ को लेकर ll  अगरिया जनजाति समाज जो की आदिम काल की जनजाति जिनकी संस्कृति वास्तव मे आज किसी नाम, पहचान की मौताज नहीं है लेकिन ये इस समाज का दुर्भाग्य है की ये अगरिया जनजाति समाज आज सबसे पिछड़ा समाज है, समाज आज शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी हर स्तर से पिछड़ा हुआ है ll अगरिया जनजाति समाज जिसकी संस्कृति लौह अयस्क से लोहा बनाना है ये वही जनजाति है जिसने लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म दिया, सबसे पहले इस जनजाति ने जंगल मे रहते हुए लौह अयस्क (लौह पत्थर) को पहचाना और पारम्परिक तरीके से लोहा बनाया और इस देश दुनिया समाज को लोहा जैसे चमत्कारी धातु से अवगत करायाll आज अगरिया जनजाति समाज की संस्कृति को अपना कर कई बड़े बड़े कंपनी लोहा बना रहे है ll लेकिन इस लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म देने वाली जनजाति अगरिया जनजाति ही है ll ऐसा वैज्ञानिक अगरिया जनजाति समाज जिसका इस देश समाज ...

अगरिया चोख महली के बारे में

  तो चलिए जानने का प्रयास करते है सम्बन्ध एवं कुछ अन्य भी जानकारिया उत्तरी उदयपुर की एक अगरिया कथा ,हमें अगरिया और महली चोख में सम्बन्ध दर्शाती है।  साबरसाय के १२ लड़के थे। इस प्रकार की कथा हमें देहिदानर के कानपि अगरिया से मिलती है। वे १२ असुर भाई कहे जाते थे। वे लोहा पिघलाने वाले महान श्रमिक थे। उनमे से एक भाई ने महली लड़कियों को अपनी पत्नी बनाया और उनकी संतान महली चोख कहलायी। लोगुंडी राजा असुर था। उसका तथा उसकी असुरिन पत्नी को लोहा गलाने की भट्ठी के सामने सूअर चढ़ाया जाता था। साबरसाय तथा लोहगुंडि राजा मंडला में प्रचलित अगरिया किवदंतियो के प्रधान नायक है। कुछ अन्य गाँवों में यह बतलाया जाता है की किस प्रकार साबरसाय ने लोहरीपुर को प्राप्त किया था। (यह गाँव मंडला के समांतर है )जी आसाम से सात दिन की यात्रा की दूरी उत्तर पशिचम में स्थित है लोहरीपुर के बारहों राक्षस भाई ,भागकर जशपुर तहसील के सरायदि गाँव आ गए थे जहा आज भी लौह अयस्क के बड़े बड़े चट्टान देखे जा सकते है।  उदयपुर के अन्य अगरिया चोख स्मिथ ,लोगुंडी राजा था साबरसाय को मानते है और यहाँ तक की लोगुंडी राजा व लोहासुर को भी। एक...