💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
15 नवंबर को फाउंडेशन का चौथा स्थापना दिवस 2023 कहाँ और कैसे मनाया जाना है गाइडलाइन जारी लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन द्वारा ll
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का स्थापना दिवस कब और कैसे मनाया जाना है फाउंडेशन द्वारा गाइड लाइन जारी कर दी गयी है ll आपको बता दे लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का (निर्माण )स्थापना दिनांक 15 नवंबर 2019 को हुआ था जिसका उद्देश्य अगरिया जनजाति समाज को संरक्षित करना संस्कृति को संरक्षित करना, संगठित समाज का निर्माण सम्पूर्ण भारत स्तर पर करना,शिक्षा, नशा मुक्ति, सहयोग, एवं अगरिया समाज के सम्पूर्ण उत्थान विकास को लेकर कई उद्देश्य के तहत फाउंडेशन कार्य कर रहा है ll उक्त कई वर्षो से फाउंडेशन लगातार अगरिया समाज के अस्तित्व की प्राप्ति हेतु प्रयास करता चला आ रहा है ll फाउंडेशन सफलता पूर्वक 3 वर्ष पूरा कर चुका ll अब आने वाले 15 नवंबर 2023 को संगठन का चौथा स्थापना दिवस मनाया जाना है जिसके सम्बन्ध मे संगठन ने गाइड लाइन जारी कर दिया है की कहाँ,कैसे, किस प्रकार फाउंडेशन का स्थापना दिवस मनाया जाना है ll फाउंडेशन मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ अगरिया द्वारा जानकारी दी गयी की फाउंडेशन के चौथे स्थापना दिवस जो 15 नवंबर 2023 को मनाया जाना है उसको अगरिया जनजाति के गौरव दिवस के रूप मे मनाय...