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अगरिया जनजाति से जुड़ी ख़ास बाते एवं उनका रहन सहन

अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...

अगरिया जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) मे शामिल किये जाने को लेकर ज्ञापन सौपे शहडोल मे अगरिया समाज के कार्यकर्त्ता ll

शहडोल मध्यप्रदेश के ज़िला इकाई लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के कार्यकर्त्ता  गनपत अगरिया और उनकी टीम ने अगरिया जनजाति समाज  के समस्याओ और पिछड़ेपन को ध्यान मे रखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एवं  माननीय प्रदान मंत्री जी नाम ज्ञापन सौपे ll  जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज मे शामिल किये जाने  :-  को लेकर बताया गया की अगरिया जनजाति समाज आज के इस आधुनिक परिवेश मे सबसे पिछड़ा समाज है सरकार द्वारा जिन जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज(PVGT) का दर्जा दिया गया है उन जनजाति समाज से भी अति पिछड़ा समाज अगरिया जनजाति समाज है, शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी तथा सामाजिक रहन सहन मे अगरिया जनजाति समाज पिछड़ा समाज है ll आज इस अगरिया जनजाति समाज को भारत सरकार,राज्य सरकार के संरक्षण एवं आशीर्वाद की आवश्यकता है इस जनजाति समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है ll अगरिया जनजाति समाज का मानना है की सरकार अगरिया जनजाति समाज का सर्वे ले (शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी सामाजिक रहन सहन को आधार मानकर) उस स्थिति मे यदिllअगरिया समाज अन्य समाजो से पिछड़ा पाया जाता है...