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राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी) राजा लौहगुंडी:-अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक

💥   राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के  नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...

अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम 2026 ज़िला इकाई कबीरधाम छ ग मे संपन्न हुआ ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे ll

दिनांक 08/03/2026 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे ज़िला इकाई कबीरधाम छत्तीसगढ़ मे  अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम 2026 संपन्न हुआ ll  ज़िला कबीरधाम छत्तीसगढ़ मे यह आयोजन ग्राम कोयलारी ग्राम पंचायत चंद्रादादर ब्लॉक बोड़ला मे संपन्न हुआ ll  लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे प्रत्येक वर्ष अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन फाउंडेशन से जुड़े सभी जिलों एवं राज्यों के करवाया जाता है ll जिसका मुख्य उद्देश्य फाउंडेशन  द्वारा समाज के उत्थान विकास मे चलाये जा रहे समस्त उद्देश्य को अगरिया जनसमुदाय तक पहुँचाना एवं फाउंडेशन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है ll  अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम अंतर्गत हर वर्ष प्रत्येक जिलों मे इस आयोजन के लिए सभी जिलों के लिए कम से कम दो नोडल की नियुक्ति किया जाता है ll नोडल कार्यक्रम के दिन जिले मे उपस्थित होकर कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति मे संपन्न कराते है ll जिलों के लिए नियुक्त नोडलो को फाउंडेशन का एजेंडा दिया जाता है जो कार्यक्रम के दौरान एजेंडा के सभी बिन्दुओ को बिंदुवार समझाते हु...