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2027-28 कक्षा 9 मे प्रवेश हेतु जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रवेश परीक्षा फार्म भरना शुरू हो गया है ll जल्दी करें ll इस वर्ष 2026-27 मे कक्षा 8 मे पढ़ने वाले विद्यार्थी सभी फार्म भर सकते है

 जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा 9 में प्रवेश 2027–28 जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में कक्षा 9 में प्रवेश के लिए नवोदय विद्यालय समिति द्वारा Lateral Entry Selection Test (LEST) 2027 हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह प्रवेश उपलब्ध रिक्त सीटों के आधार पर होगा। 📅 महत्वपूर्ण तिथियां 🔹 ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 02 सितंबर 2026 🔹 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026 🔹 प्रवेश परीक्षा: 10 अप्रैल 2027 🔹 आवेदन शुल्क: कोई शुल्क नहीं आधिकारिक NVS पोर्टल पर भी अंतिम तिथि 30-09-2026 अंकित है। 👩‍🎓👨‍🎓 कौन-कौन से विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं? कक्षा 9 में प्रवेश के लिए विद्यार्थी को— शैक्षणिक सत्र 2026–27 में कक्षा 8 में अध्ययनरत होना चाहिए। विद्यार्थी किसी सरकारी अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालय में कक्षा 8 में पढ़ रहा हो। विद्यार्थी की जन्मतिथि निर्धारित आयु सीमा के अनुसार होनी चाहिए। प्रवेश Lateral Entry Selection Test में उपलब्ध रिक्त सीटों एवं NVS के निर्धारित नियमों के आधार पर होगा। लड़के और लड़कियां दोनों आवेदन कर सकते हैं। सभी वर्ग के छात्र छात्...

मध्यप्रदेश मे अगरिया जनजाति का अस्तित्व

मध्यप्रदेश में अगरिया जनजाति के अस्तित्व के बारे में जानकारी: 1. परिचय: अगरिया जनजाति भारत के पारंपरिक आदिवासी समुदायों में से एक है, जो मुख्यतः मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पाई जाती है। यह जनजाति ऐतिहासिक रूप से लोहा गलाने (Iron Smelting) की पारंपरिक कला के लिए जानी जाती है। 2. मध्यप्रदेश में उपस्थिति: अगरिया जनजाति मुख्य रूप से सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और डिंडोरी जिलों में पाई जाती है। यह जनजाति विशेषकर वनवासी क्षेत्रों में रहती है और पारंपरिक जीवनशैली अपनाए हुए है। 3. पारंपरिक पहचान: अगरिया लोग पारंपरिक रूप से लोहे को गलाकर औजार, खेती के उपकरण और हथियार बनाते थे। यह कार्य वे कोठी भट्ठी और धौकनी की मदद से करते थे। इनकी यह पारंपरिक तकनीक पूरी तरह स्वदेशी और पर्यावरण के अनुकूल थी। 4. सामाजिक और आर्थिक स्थिति: आज अगरिया जनजाति आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई मानी जाती है। इनकी पारंपरिक धंधा (लोहा गलाना) अब लगभग विलुप्त हो चुका है, क्योंकि आधुनिक तकनीक और औद्योगीकरण ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया। आजकल यह समुदाय खेती, मजदूरी, वनोपज संग्रहण जैसे कार्यों मे...

अगरिया समुदाय

अगरिया आदिवासी के बारे मे ll 👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽 यह तस्वीर अगरिया समुदाय के पारम्परिक तरीके से लोहा गलाने की प्रक्रिया को दर्शाती है। इसमें एक मिट्टी और पत्थर से बना भट्ठा है, जिसमें जलता हुआ कोयला और चमकता हुआ पिघला हुआ लोहा दिखाई दे रहा है। चार लोग इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं—एक महिला धौंकनी (bellows) चला रही है, एक व्यक्ति पिघले हुए लोहे को छड़ से नियंत्रित कर रहा है, और अन्य लोग प्रक्रिया को देख रहे हैं। उनके कपड़े पारंपरिक और रंगीन हैं, जो ग्रामीण परिवेश को जीवंत बनाते हैं। अगरिया जनजाति का इतिहास यही है जो पूर्व काल मे जंगल मे निवास करते करते अपने जीवन यापन के लिए लौह अयस्क (लौह पत्थर) से अपने पारम्परिक पद्धति से कोठी और भट्ठी से लोहा बनाया ll इस दुनिया मे सबसे पहले लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म देने वाली जनजाति अगरिया जनजाति है ll आज इस संस्कृति को अपना कर कई कंपनी लोहा का उत्पादन कर रहे है ll अगरिया जनजाति आज के इस आधुनिक समाज मे भी एक पिछड़ा हुआ आदिवासी समाज है ll मध्यप्रदेश शासन एवं भारत सरकार को अगरिया जनजाति समाज को बेहतर स्थिति मे लाने के ल...