अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन(LOUH PRAGALAK AGARIYA JANJATI BHARAT FOUNDATION)मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला मे स्थित एक गैर लाभकारी सामाजिक संस्था है ज़ी सेक्शन -8 के तहत पंजीकृत संस्था है ll जो विशेष रूप से अगरिया आदिवासी सामुदाय के उत्थान, सशक्तिकरण और संस्कृति विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है ll संस्था की मुख्य जानकारी :- ° स्थापना तिथि - लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की स्थापना 20 मार्च 2023 को हुआ ll ° मुख्यालय - ग्राम -सोही बेलहा,पोस्ट -भाद, तहसील - कोतमा, जिला -अनूपपुर (मध्यप्रदेश) है ll ° मुख्य पदाधिकारी (संस्था संस्थापक / मैनेजिंग डायरेक्टर)- दशरथ प्रसाद अगरिया ° सदस्य - विजय कुमार अगरिया, रामखिलावन अगरिया, अन्नू अगरिया ° पंजीयन क्रमांक - 141979 ° CIN NO- U88900MP2023NPL064902 फाउंडेशन के प्रमुख उद्देश्य एवं कार्य:- लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन कई सामाजिक और कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन करता है ll • शिक्षा सहायता :- जरूरतमंद बच्चों को स्कूल / कॉलेज मे प्रवेश दिलाना और बैग,कॉपी पुस्तके वितरित करना ll • स्कूलों का विकास ...