अगरिया जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर 2026) सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अगरिया जनजाति की जनसंख्या एवं रहन सहन से जुड़ी जानकारी

💥अगरिया जनजाति : परिचय💥 अगरिया मध्यप्रदेश की एक अनुसूचित जनजाति है, जिसकी पहचान ऐतिहासिक रूप से लौह-अयस्क से पारंपरिक तरीके से लोहा गलाने और लोहे के औजार बनाने की तकनीक से जुड़ी रही है। ऐतिहासिक अभिलेखों में मध्यप्रदेश के अगरियों का विशेष उल्लेख मिलता है और अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, मंडला जैसे कई क्षेत्र में उनकी पारंपरिक लौह-कर्म परंपरा की एकाग्रता का उल्लेख किया गया है। � 📊 मध्यप्रदेश में अगरिया जनसंख्या✅ 2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसंख्या 41,243 थी, जिसमें: पुरुष — 20,706 महिलाएँ — 20,537 कुल परिवार — लगभग 9,609 लिंगानुपात — 992 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष बाल लिंगानुपात — 965 कुल साक्षरता — लगभग 43.9% ये आंकड़े 2011 Census के ST सांख्यिकीय प्रोफाइल से मेल खाते हैं; भारत सरकार के संसदीय दस्तावेज में भी मध्यप्रदेश के लिए अगरिया की संख्या 41,243 दी गई है। � 👉ध्यान दें:-  41,243 पुराना, 2011 का आधिकारिक जनगणना आंकड़ा है। वर्तमान 2026 की वास्तविक आबादी इससे अलग हो सकती है; नई पूर्ण जनगणना के बिना वर्तमान संख्या को निश्चित रूप...

अगरिया जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर 2026)

🌿🔥 जब होगा सबका साथ, तभी होगा समाज का विकास 🔥🌿
जय अगरिया 🚩 जय लोहासुर 🔥 जय अंगार मोती 🙏
आइये मिलकर बढ़ायें एक कदम समाज की ओर…
🏹 15 नवम्बर 2026 🏹
अगरिया जनजाति गौरव दिवस
(फाउंडेशन 7वाँ स्थापना दिवस)
अगरिया जनजाति का गौरव केवल हमारे इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, मेहनत, स्वाभिमान और वैज्ञानिक विरासत में जीवित है। हमारी पहचान उस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है, जिसमें हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों के ज्ञान के आधार पर लौह प्रगलन तकनीक जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी परंपरा को विकसित किया और आगे बढ़ाया।
इसी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और पहचान को सम्मान देने के लिए 15 नवम्बर 2026 को कोतमा में अगरिया जनजाति गौरव दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाएगा। यह अवसर लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के 7वें स्थापना दिवस का भी गौरवपूर्ण अवसर है।
✨ यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है…
यह हमारी पहचान को याद करने का दिन है।
यह हमारी विरासत पर गर्व करने का दिन है।
यह अपनी संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दिन है।
यह समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में जोड़ने और एकता, शिक्षा, संगठन एवं विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेने का दिन है।
आज आवश्यकता है कि हम अपने व्यक्तिगत मतभेदों और सीमाओं से ऊपर उठकर समाजहित को प्राथमिकता दें। जब हमारे समाज का हर परिवार, हर युवा, हर बुजुर्ग, हर माता-बहन और हर बच्चा अपनी जिम्मेदारी को समझेगा, तभी हमारा समाज मजबूत और सशक्त बनेगा।
🤝 आइये, हम सब मिलकर संकल्प लें—
✅ अपनी संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखेंगे।
✅ अपनी नई पीढ़ी को अपनी पहचान और इतिहास से परिचित कराएंगे।
✅ शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बनाएंगे।
✅ समाज में एकता, भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत करेंगे।
✅ जरूरतमंद समाजजनों के साथ खड़े रहेंगे।
✅ संगठित होकर समाज के विकास के लिए सकारात्मक प्रयास करेंगे।
🌱 हमारी विरासत हमारी शक्ति है,
हमारी एकता हमारी पहचान है,
और हमारा संगठित प्रयास हमारे समाज का भविष्य है।
आइये, इस ऐतिहासिक अवसर पर हम सभी मिलकर अपने गौरवशाली अगरिया जनजाति की सभ्यता, संस्कृति एवं लौह प्रगलन की वैज्ञानिक परंपरा को सम्मान दें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, शिक्षित, संगठित एवं सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें।
📍 स्थान — कोतमा
📅 दिनांक — 15 नवम्बर 2026
🎉 अगरिया जनजाति गौरव दिवस एवं फाउंडेशन 7वाँ स्थापना दिवस
आपका एक कदम समाज की एक नई दिशा बन सकता है।
आइये, मिलकर बढ़ायें एक कदम समाज की ओर। ❤️
🚩 जय अगरिया
🔥 जय लोहासुर
🙏 जय अंगार मोती
विनीत —
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन

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  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी  1 -अगरिया जनजाति की मध्य प्रदेश में जनसँख्या-  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसँख्या लगभग 41243 है जो प्रदेश की कुल जनसँख्या का 0.057  प्रतिशत है।   2 -अगरिया निवास क्षेत्र -अगरिया वैसे मध्यप्रदेश के कई जिलों में पाए जाते है पर मुख्यतः अधिक संख्या में अनूपपुर ,शहडोल उमरिया ,कटनी ,मंडला ,बालाघाट ,सीधी ,सिंगरौली में मुख्यतः पाए जाते है।  3 -अगरिया गोत्र -अगरिया जनजाति में कुल 89 गोत्र पाए जाते है। (सम्पूर्ण गोत्र की जानकारी के लिए यू ट्यूब पर अगरिया समाज संगठन भारत सर्च करे और विडिओ देखे )(विडिओ देखने के लिए लिंक पर क्लीक करे - https://youtu.be/D5RSMaLql1M   )जिनमे से कुछ  प्रमुख गोत्र है सोनवानी ,अहिंद ,धुर्वे ,मरकाम ,टेकाम ,चिरई ,नाग ,तिलाम ,उइके,बघेल  आदि है प्रत्येक गोत्र में टोटम पाए जाते है। एवं अगरिया जनजाति का प्रत्येक गोत्र प्राकृतिक से लिया गया है अर्थात पेड़ पौधे ,जीव जंतु से ही लिया गया है। उदाहरण के लिए जैसे बघेल गोत्र बाघ से लिया गया है।  4-...

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