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अगरिया जनजाति से जुड़ी ख़ास बाते एवं उनका रहन सहन

अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...

कलेक्टर कार्यालय अनूपपुर मे अगरिया समाज राष्ट्रीय भवन निर्माण हेतु शासकीय ज़मीन हेतु ज्ञापन दिए लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के कार्यकर्त्ता

अगरिया समाज के राष्ट्रीय भवन निर्माण हेतु लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के कार्यकर्ताओ ने दिनांक 27/06/2023 को कलेक्टर कार्यालय अनूपपुर मे शासकीय ज़मीन के लिए जिला अनूपपुर माननीय कलेक्टर महोदय के ज्ञापन दिए ll ज्ञापन राष्ट्रीय कार्यकर्त्ता एवं जिला अनूपपुर के सह - नेतृत्व मे दिया गया ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन रेजिस्ट्रेशन क्रमांक 141979 जिसका उदगम् जिला(संगठन की उत्पत्ति )अनूपपुर मध्यप्रदेश हैं ll जिसके अंतर्गत संगठन के समस्त बड़े आयोजन जैसे राष्ट्रीय महासम्मेलन, स्थापना दिवस जिला अनूपपुर कोतमा मे ही आयोजित किये जाते हैं जहाँ सम्पूर्ण भारत के कई राज्यों से अगरिया समाज के स्वजातीय बंधु, माताए बहने बच्चे, बड़े बुजुर्ग 1000-1200 की संख्या मे कार्यक्रम मे उपस्थित होते हैं ll जिसके लिए राष्ट्रीय भवन की अत्यंत आवश्यकता रही हैं क्योंकि ऐसी क्षमता का भवन किराया से उपलब्ध नहीं हो पाता था और उपलब्ध भी होता था तो अधिक से अधिक किराया के रूप मे भुगतान करना पड़ता था ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन सम्पूर्ण भारत के अगरिया समाज का समाज...