लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे जिला डिंडोरी के ग्राम - विक्रमपुर मे दिनांक 24/05/2026 को अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम संपन्न हुआ ll जिला इकाई डिंडोरी मध्यप्रदेश अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम के लिए नियुक्त नोडल श्री उबरन अगरिया, श्री चूड़ामणि अगरिया, श्री जीवन अगरिया, श्री सागर अगरिया एवं रामदयाल अगरिया तथा उनकी 16 सदस्यों की टीम की उपस्थिति मे कार्यक्रम संपन्न हुआ ll श्री उबरन अगरिया ज़ी के द्वारा अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास मे फाउंडेशन द्वारा चलाये जा रहे फाउंडेशन के 26 बिन्दुओ का वाचन करते हुए समस्त जिला डिंडोरी वासियो को फाउंडेशन के विचार धारा मे एक विचार धारा मे संगठित होने का सन्देश दिया गया ll अगरिया जनजाति समाज एवं समाज की संस्कृति का संरक्षण का सन्देश देते हुए उन्होंने बताया की अपने समाज एवं अपने संस्कृति का सम्मान करना हम सभी का धर्म है हमें अपने अंतिम सांस तक अपने समाज की वैज्ञानिक संस्कृति एवं इतिहास को संरक्षण करते हुए पालन करना होगा क्योंकि अगरिया जनजाति समाज जिसने सबसे पहले लौह अयस्क की पहचान किया तथा पारम्परिक तकनीक स...
अगरिया जनजाति (Agariya Tribe) भारत की एक परंपरागत आदिवासी जनजाति है, जो मुख्य रूप से लोहा गलाने और लोहा बनाने की पारंपरिक तकनीक के लिए जानी जाती है। यह जनजाति मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में पाई जाती है। अगरिया समाज में कई गोत्र (वंश या कुल) पाए जाते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख गोत्र है “सोनवानी गोत्र”। सोनवानी गोत्र का परिचय:- 1. अर्थ और मान्यता – “सोनवानी” शब्द दो भागों से मिलकर बना है – सोना (स्वर्ण) और वानी/वानीया (जल या पवित्रता से जुड़ा अर्थ)। इस गोत्र का संबंध पवित्रता और स्वर्णिम परंपरा से जोड़ा जाता है। 2. सामाजिक स्थान – सोनवानी गोत्र को अगरिया समाज में एक सम्मानजनक गोत्र माना जाता है। इस गोत्र के लोग पारंपरिक रूप से समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। 3. विशेषता – सोनवानी गोत्र के लोग प्रायः शुद्धता और नियमों के पालन में माने जाते हैं। विवाह आदि अवसरों पर यह गोत्र विशिष्ट धार्मिक जिम्मेदारी निभाता है। अन्य गोत्रों की तरह, यह गोत्र भी अपने अंदर विवाह संबंध नहीं करता (गोत्रांतर्गत विवाह निषिद्ध है)। 4. अगरिया ...