लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के संस्थापक श्री दशरथ प्रसाद अगरिया है ll जो ज़िला अनूपपुर मध्यप्रदेश से है ll
आदिवासी आदिवासी के बारे में आइये जानने का प्रयास करते है वास्तव में आदिवासी का मतलब क्या है। "आदि " "वासी "नाम में ही सार छुपा है आदिकाल के निवासी। किसी ने यह शब्द बड़े ही सोच विचार के इजात किया , इस शब्द से ही सब कुछ व्यक्त हो जाता है जैसे - आदिकाल का इतिहास ,जल ,जंगल ,जमीन का सार , कला -संस्कृति का रंग सार्थकता के लिए निवासी क्षेत्र का निर्माण। हमारे जीवन का राज यही जल ,जंगल ,जमीन है। जिसकी सार्थकता हम दिन प्रतिदिन खोते जा रहे है। जिसकी कदर करना हम छोड़ते जा रहे है। शान -शोहरत की दुनिया में बढ़ते चले जा रहे है , जाने अनजाने में प्रकृति को नुक्सान पहुंचाते चले जा रहे है। अब जरा सोचिये क्या कर रहे है आप मै और हम आदिवासी आज सुदूर जंगलो पहाड़ो पर निवास करते है जो पूरी तरह पर्यावरण अर्थात पृकृति पर निर्भर होते है आदिवासी पूर्ण रूप पृकृति पूजक होते है। आदिवासियों की धरोहर उनकी संस्कृति ,पहनावा ,भेसभूसा ,रहन सहन , कई तरह के टोटके है जो उनको जीवन शक्ति देता है एवं उन्हें...