अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
संविधान का निर्माण संविधान की रूपरेखा # भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली सभा का गठन जुलाई ,1946 में (कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों पर ) किया गया। #संविधान सभा जिसका चुनाव प्रादेशिक विधानसभाओ (केवल निम्न सदन )के सदस्यों द्वारा परोक्ष रूप से किया गया था। ,की पहली बैठक 9 दिसम्बर ,1946 को संपन्न हुई। #मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की पहली बैठक का बहिष्कार किया था। इस प्रथम बैठक में ही डॉ. सचिदानंद सिन्हा को सर्वसम्मति से संविधान सभा अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर ,1946 की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया। #डॉ. बी आर अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा की प्रारूप समिति की स्थापना 29 अगस्त ,1947 को की गयी। अध्यक्ष सहित इसके सदस्यों की कुल संख्या सात थी। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष ,11 महीने और 18 दिन लगे। #26 नवंबर ,1949 को संविंधान -सभा के अध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद इसे पारित घोसित किया गया। #भारत का संविधान 26 नवंबर ,1949 को अंगीकार किया गया तथा 26 जनवरी ,1950 प्र...