अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
शहडोल मध्यप्रदेश मे अगरिया जोड़ो अभियान सम्पन्न ll फाउंडेशन मैनेजिंग डायरेक्टर शहडोल पहुचे जागरूक करने समाज को दिनांक 17.07.2024
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास की संस्था है जिसका उद्देश्य अगरिया जनजाति समाज को संगठित करना, अगरिया जनजाति समाज का संरक्षण, संस्कृति का संरक्षण करना है, ऐसे कई उद्देश्य को लेकर संस्था कार्य कर रहा है ll समाज के उत्थान विकास के लिए भी संस्था द्वारा कई गतिविधिया एवं योजनाये बनाये गए है ll उद्देश्ययों को अगरिया जन समुदाय तक पहुंचाने एवं संस्था से लोगो को जोड़ने के लिए फाउंडेशन द्वारा हर साल अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन माह मार्च अप्रैल मे किया जाता है कार्यक्रम मे फाउंडेशन के एजेंडा का वाचन किया जाता है नियुक्त नोडल कार्यकर्त्ता अधिकारी की उपस्थिति मे ll अगरिया जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन जिलाध्यक्ष गनपत अगरिया एवं शहडोल जिला समिति के सफल आयोजन मे जिला शहडोल मध्यप्रदेश मे दिनांक 17.07.2024 को जहा फाउंडेशन द्वारा नियुक्त नोडल श्री माखन लाल अगरिया श्री मयाराम अगरिया (अनूपपुर) रहे जिनके उपस्थिति मे कार्यक्रम का सम्पन्न हुआ ll माखन अगरिया (नोडल कार्यकर्त्ता) द्वारा फाउंडेशन द्वारा एजेंडा का विधिवत विश्लेषण किया गया औ...