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एजेंडा वाचन एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम ll अगरिया समाज जोड़ो अभियान 2026 जिला रायगढ़ के ग्राम सरईपाली मे सम्पन्न हुआ ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ll

अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जो लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन से जुड़े सभी राज्यों के जिलों मे संपन्न कराया जाता है ll दिनांक 19 अप्रैल 2026 को जिला रायगढ़ के ग्राम सरईपाली मे सफलता पूर्वक संपन्न हुआ ll जिला रायगढ़ समिति एवं जिलाध्यक्ष श्री उबरन अगरिया जिनके सफल आयोजन से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ll जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़ अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम हेतु लौह प्रगलक अगरिया भारत फाउंडेशन की ओर से नोडल / मुख्य अतिथि के रूप मे श्री अन्नू अगरिया एवं श्री गजपति अगरिया की नियुक्ति हुई थी जिनको कार्यक्रम मे उपस्थित होकर अपने कुशल नेतृत्व मे कार्यक्रम का सफल आयोजन संपन्न कराना था लेकिन दोनों नोडल के घर एक ही समय मे शादी लगन कार्यक्रम होने के वजह से दोनों नोडल उपस्थित नहीं हो पाए, दोनों नोडल की अनुपस्थिति मे रायगढ़ जिला के जिलाध्यक्ष श्री उबरन अगरिया ज़ी को ही नोडल का दायित्व फाउंडेशन द्वारा दिया गया  जिनके कुशल नेतृत्व मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम रायगढ़ जिला मे संपन्न हुआ ll  अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जहाँ आज लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के...

मध्यप्रदेश मे अगरिया जनजाति का अस्तित्व

मध्यप्रदेश में अगरिया जनजाति के अस्तित्व के बारे में जानकारी: 1. परिचय: अगरिया जनजाति भारत के पारंपरिक आदिवासी समुदायों में से एक है, जो मुख्यतः मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पाई जाती है। यह जनजाति ऐतिहासिक रूप से लोहा गलाने (Iron Smelting) की पारंपरिक कला के लिए जानी जाती है। 2. मध्यप्रदेश में उपस्थिति: अगरिया जनजाति मुख्य रूप से सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और डिंडोरी जिलों में पाई जाती है। यह जनजाति विशेषकर वनवासी क्षेत्रों में रहती है और पारंपरिक जीवनशैली अपनाए हुए है। 3. पारंपरिक पहचान: अगरिया लोग पारंपरिक रूप से लोहे को गलाकर औजार, खेती के उपकरण और हथियार बनाते थे। यह कार्य वे कोठी भट्ठी और धौकनी की मदद से करते थे। इनकी यह पारंपरिक तकनीक पूरी तरह स्वदेशी और पर्यावरण के अनुकूल थी। 4. सामाजिक और आर्थिक स्थिति: आज अगरिया जनजाति आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई मानी जाती है। इनकी पारंपरिक धंधा (लोहा गलाना) अब लगभग विलुप्त हो चुका है, क्योंकि आधुनिक तकनीक और औद्योगीकरण ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया। आजकल यह समुदाय खेती, मजदूरी, वनोपज संग्रहण जैसे कार्यों मे...

अगरिया जनजाति के बारे मे (about agariya tribe)

अगरिया जनजाति भारत की एक पारंपरिक आदिवासी जनजाति है, जो मुख्यतः मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, और झारखंड में निवास करती है। यह जनजाति खासकर पारंपरिक लोहा गलाने और लोहे के औजार बनाने के लिए जानी जाती है। इनकी पहचान भारत की सबसे प्राचीन धातुकार जातियों में होती है। अगरिया जनजाति की प्रमुख विशेषताएँ: 1. पारंपरिक पेशा – लोहा गलाना: अगरिया लोग पारंपरिक रूप से लोहे की खदानों से कच्चा लोहा (आयरन ओर) लाकर उसे भट्ठियों में गलाकर औजार, हथियार और उपकरण बनाते थे। ये अपने बनाए औजार गाँव के किसानों, लकड़हारों और दस्तकारों को बेचते थे। 2. पारंपरिक तकनीक: ये लोग लकड़ी की धौंकनी (फुकनी), मिट्टी की भट्ठी और हाथ से बनाए औजारों का उपयोग करते हैं। इनकी तकनीक बेहद सहज और पर्यावरण-संगत होती है। 3. भूगोलिक वितरण: मध्य प्रदेश के शहडोल, डिंडोरी, अनूपपुर, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, मंडला, बालाघाट आदि ज़िलों में इनकी बड़ी आबादी है। छत्तीसगढ़ में कोरिया मनेन्द्रगढ़ कबीरधाम आदि में ये बसे हैं। 4. समाज और संस्कृति: ये प्रकृति-पूजक होते हैं और धरती माता, आग, लोहा आदि की पूजा करते हैं। अगरिय...