अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
अगरिया समाज राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 को लेकर जिला सिंगरौली मप्र मे बैठक संपन्न हुआ ll 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का " कोतमा रास्ट्रीय महासम्मेलन जिला-अनुपपुर " के तत्वावधान में आकस्मिक बैठक आज दिनांक-10-09-2023 को समय 2.30 बजे दिन स्थान बृजलाल अगरिया के निज निवास स्थान भीखाझरिया जिला सिंगरौली में श्री राजकुमार अगरिया जिलाध्यक्ष जिला सिंगरौली के अध्यक्षता में बैठक रखी गई जिसमे प्रस्तावित नोडल अधिकारी श्री बीरबल अगरिया ग्राम सोनगढ जिला सीधी,व अन्य सदस्य (1) पन्नेलाल अगरिया मझौली पाठ सिंगरौली (2)रामदुलारे अगरिया खनुआ सिंगरौली (3)भैयालाल अगरिया बोदा चितरंगी सिंगरौली (4)मोहनलाल अगरिया भीखाझरिया देवसर सिंगरौली (5)बृजभान अगरिया भीखाझरिया देवसर सिंगरौली एवम् अन्य सदस्य महानुभाव उपस्थित हुए बैठक दरम्यान रास्ट्रीय सम्मेलन व स्थापना दिवस पर विशेष चर्चा की गई,तत्पश्चात सदस्यता शुल्क एवम् आवस्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तृत चर्चा की गई व सम्मेलन में अनिवार्य रूप से भाग लेने पर जोर दी गई।...