💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
आज दिनांक 30/04/2023 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन कार्यालय मे संगठन एवं अगरिया जनजाति समाज को अपने संगीत गीत के माध्यम से जगाने वाले गायक " श्री रामविलास अगरिया जी अनूपपुर को संगठन कार्यालय मे सह सम्मान आमंत्रित किया गया गया जहाँ संगठन मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ अगरिया द्वारा श्री मायाराम अगरिया अनूपपुर जिलाध्यक्ष के हाथों पुरुस्कार / भेट स्वरुप एक सेट शेरवानी डिज़ाइन (कुर्ता पैजामा) श्री रामविलास जी को भेट स्वरुप प्रदान किया गया ll संगठन इनके कला एवं गीत को धन्यवाद देता हैं जिससे आज इनके कला के वजह से अगरिया समाज के गाने हर जगह अगरिया जनजाति के अस्तित्व को बता रहे हैं पहचान को बता रहे हैं ll आज अगरिया जनजाति के पहचान अस्तित्व को उजागर करने की आवश्यकता हैं समाज के हर वीरांगना एवं स्वजातीय बंधुओ से संगठन अपील करता हैं संगठित होकर एस समाज को संरक्षित करें एवं समाज मे शिक्षा के लिए पहल करें, समाज को संस्कारी, नशा मुक्त समाज बनाये ll💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐