अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
अगरिया समाज संगठन भारत जिला कोरबा छ ग के कार्यकर्त्ता गांव गांव जाकर समाज को जागरूक करते हुये ll 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 आज दिनांक 28/11/2022को ग्राम दुमदुमी ,नवाडीह ,कन्हैया पारा,और बिजराभौना जिला कोरबा छत्तीशगढ़ का दौरा श्री दुबराजसिह अगरिया और सुदर्शनअगरिया जी द्वारा लोगों को राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज संगठन भारत के उद्देश्यों के बारे में जन जन तक पहुंचाने पहल किया जा रहा है संगठन के उद्देश्यों एवं विचार धारा से अवगत कराते हुए संगठन से जुड़ने हेतु प्रेरित किया जा रहा है ll बीते कुछ दिनों ज़ब से संगठन का राष्ट्रीय महासम्मेलन एवं स्थापना दिवस मनाया गया है तब से संगठन की ओर से आयोजित जिला जागरूकता कार्यक्रम की गतिविधि मे जिला कोरबा मे काफी जागरूकता देखने को मिला है ll दुबराज अगरिया जी एवं सुदर्शन अगरिया जी का कहना है संगठन हमारा है समाज हमारा है और हम सब को इसकी जिम्मेदारी लेना पड़ेगा तभी हमारा समाज जागरूक होगा आज इस समाज को हम सभी की आवश्यकता है हम सभी को संगठन की ओर से अच्छे विचार के साथ आगे आना होगा तभी समाज का अस्तित्व प्राप्त होगा ll इन कार्...