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अगरिया समाज जिला विकास अभियान कार्यक्रम 2026: झारखंड के गढ़वा जिले के ग्राम कुम्बा खुर्द में सामाजिक एकता और जागरूकता का सफल आयोजन (दिनांक 09/08/2026)

💥अगरिया समाज जोड़ो अभियान 2026: झारखंड के गढ़वा जिले के ग्राम कुम्बा खुर्द में सामाजिक एकता और जागरूकता का सफल आयोजन💥 👉दिनांक: 09 अगस्त 2026 👉स्थान: ग्राम कुम्बा (खुर्द ), जिला गढ़वा (झारखंड ) जय अगरिया • जय लोहासुर • जय भारत 🚩 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन में अगरिया समाज जोड़ो अभियान 2026 के अंतर्गत 09 अगस्त 2026 को जिला गढ़वा के ग्राम कुम्बा (खुर्द ) में एक भव्य एवं प्रेरणादायी सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला गढ़वा के जिलाध्यक्ष श्री शिवशंकर अगरिया एवं उपाध्यक्ष श्री संजय अगरिया के कुशल नेतृत्व एवं अथक प्रयासों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के लगभग 100 से 150 स्वजातीय बंधु, मातृशक्ति एवं युवा साथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सामाजिक एकता का परिचय दिया। इस अवसर पर अगरिया समाज जोड़ो अभियान 2026 के लिए लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन द्वारा  निर्धारित सामाजिक एजेंडे का विस्तारपूर्वक विश्लेषण करते हुए समाज के लोगों को संगठन की आवश्यकता, सामाजिक दायित्व एवं विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संदेश द...
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राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी) राजा लौहगुंडी:-अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक

💥   राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के  नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...

💥आयुष्मान भारत कार्ड: 2026 में पात्रता और अप्लाई करने का तरीका💥

💥आयुष्मान भारत कार्ड: 2026 में पात्रता और अप्लाई करने का तरीका💥 2026 में आयुष्मान भारत कार्ड बनवाना और भी आसान हो गया है, और इसमें सबसे बड़ा बदलाव यही है। अब 70 साल और उससे ऊपर के सभी बुजुर्गों के लिए ये कार्ड फ्री है, चाहे उनकी आय कितनी भी हो। इसके लिए अलग से Ayushman Vay Vandana Card बनता है, जिसमें परिवार के 5 लाख के अलावा बुजुर्ग को अलग से 5 लाख तक का टॉप-अप कवर मिलता है। बाकी लोगों के लिए पात्रता पहले की तरह ही है: ग्रामीण क्षेत्र में अगर आपका परिवार SECC 2011 या NFSA राशन कार्ड लिस्ट में है, जैसे कच्चे मकान में रहने वाले, भूमिहीन मजदूर, SC/ST परिवार, तो आप पात्र हैं। शहरी क्षेत्र में रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर, ड्राइवर, कंस्ट्रक्शन वर्कर जैसे असंगठित क्षेत्र के कामगार पात्र हैं। 👉अप्लाई करने का सबसे आसान तरीका: 1 .  beneficiary.nha.gov.in पोर्टल पर जाएं और Beneficiary के तौर पर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। अपना राज्य, जिला और PMJAY सेलेक्ट करके आधार नंबर या राशन कार्ड / फैमिली ID से सर्च करें।  2. लिस्ट में नाम आने पर Do e-KYC पर क्लिक करें। आधार...

अगरिया जनजाति मे उड़द की दाल का क्या महत्व है ll

अगरिया जनजाति में उड़द की दाल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि कई सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि) में रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से इसका महत्व निम्न प्रकार से देखा जाता है। 🌾 शुभ कार्यों में उपयोग🌾 उड़द की दाल का प्रयोग कई मांगलिक अवसरों पर किया जाता है, जैसे: विवाह संस्कार अगरिया जनजाति में उड़द की दाल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि कई सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि) में रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से इसका महत्व निम्न प्रकार से देखा जाता है। 1. शुभ कार्यों में उपयोग उड़द की दाल का प्रयोग कई मांगलिक अवसरों पर किया जाता है, जैसे: विवाह संस्कार देव-पूजन कुलदेवता एवं ग्राम देवता की पूजा फसल या नए अनाज से जुड़े अनुष्ठान इसे समृद्धि, अन्न और शुभता का प्रतीक माना जाता है। 2. पूर्वज एवं कुलदेवता क...

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन मध्यप्रदेश। जवाहर नवोदय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक माता-पिता एवं अभिभावक अपने बच्चों का आवेदन निर्धारित तिथि के भीतर कर सकते हैं। नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के माध्यम से योग्य विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। 💥कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा हेतु पात्रता एवं आवश्यक शर्तें💥 1-बालक एवं बालिका दोनों आवेदन कर सकते हैं। 2-अभ्यर्थी का जन्म 01 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 के बीच होना चाहिए। 3-अभ्यर्थी वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा-5 में अध्ययनरत होना चाहिए। 4-सभी वर्गों (सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। 📓आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज📓 ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी— ✅ अभ्यर्थी की पासपोर्ट साइज फोटो ✅ माता या पिता के हस्ताक्षर ✅ अभ्यर्थी के स्वयं के हस्ताक्षर ✅ यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचि...

अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं

अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह प्रगलक (Iron Smelter) जनजाति है, जिसकी संस्कृति प्रकृति, पूर्वजों, देवी-देवताओं और पारंपरिक जीवन पद्धति से जुड़ी हुई है। अगरिया समाज में त्यौहार केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति पूजा, कृषि, पूर्वजों के सम्मान और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम होते हैं। 1. 🚩 लोहासुर पूजा (Lohasur Puja) अगरिया समाज में लोहासुर देव का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन क्या करते हैं: लोहासुर देव की पूजा-अर्चना करते हैं। पारंपरिक लौह कला और अपने पूर्वजों को याद करते हैं। समाज की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं। परिवार एवं समाज के लोग एकत्र होकर पूजा और सामूहिक कार्यक्रम करते हैं। 2. 🌿 अंगारमोती माता पूजा अगरिया समाज में अंगारमोती माता को शक्ति और संरक्षण की देवी के रूप में श्रद्धा दी जाती है। परंपराएं: माता की पूजा की जाती है। घर-परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं विशेष रूप से पूजा में भाग लेती हैं। पारंपरिक गीत और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। 3. 🌾 नवाखानी / नवा खाई (नई फसल...

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्पसीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026।(लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन)

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्प सीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में जिला सीधी के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज जिला विकास अभियान का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री अमरशाह अगरिया तथा उनकी पूरी जिला टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा एवं कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, नशामुक्त, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना तथा फाउंडेशन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना रहा। कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 🌻समाज को संगठित करने पर विशेष जोर🌻 बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे प्रत्येक गांव में जाकर अधिक से अधिक परिवारों को फाउंडेशन से जोड़ें तथा समाज क...