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जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा 2027-28 के लिए आवेदन शुरू, 31 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन मध्यप्रदेश। जवाहर नवोदय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा-6 में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक माता-पिता एवं अभिभावक अपने बच्चों का आवेदन निर्धारित तिथि के भीतर कर सकते हैं। नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के माध्यम से योग्य विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। 💥कक्षा-6 प्रवेश परीक्षा हेतु पात्रता एवं आवश्यक शर्तें💥 1-बालक एवं बालिका दोनों आवेदन कर सकते हैं। 2-अभ्यर्थी का जन्म 01 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 के बीच होना चाहिए। 3-अभ्यर्थी वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा-5 में अध्ययनरत होना चाहिए। 4-सभी वर्गों (सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि) के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। 📓आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज📓 ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी— ✅ अभ्यर्थी की पासपोर्ट साइज फोटो ✅ माता या पिता के हस्ताक्षर ✅ अभ्यर्थी के स्वयं के हस्ताक्षर ✅ यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचि...
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अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं

अगरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार एवं उनकी परंपराएं अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह प्रगलक (Iron Smelter) जनजाति है, जिसकी संस्कृति प्रकृति, पूर्वजों, देवी-देवताओं और पारंपरिक जीवन पद्धति से जुड़ी हुई है। अगरिया समाज में त्यौहार केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति पूजा, कृषि, पूर्वजों के सम्मान और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम होते हैं। 1. 🚩 लोहासुर पूजा (Lohasur Puja) अगरिया समाज में लोहासुर देव का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन क्या करते हैं: लोहासुर देव की पूजा-अर्चना करते हैं। पारंपरिक लौह कला और अपने पूर्वजों को याद करते हैं। समाज की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं। परिवार एवं समाज के लोग एकत्र होकर पूजा और सामूहिक कार्यक्रम करते हैं। 2. 🌿 अंगारमोती माता पूजा अगरिया समाज में अंगारमोती माता को शक्ति और संरक्षण की देवी के रूप में श्रद्धा दी जाती है। परंपराएं: माता की पूजा की जाती है। घर-परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं विशेष रूप से पूजा में भाग लेती हैं। पारंपरिक गीत और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। 3. 🌾 नवाखानी / नवा खाई (नई फसल...

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्पसीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026।(लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन)

सीधी (मध्यप्रदेश) के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त, शिक्षित एवं नशामुक्त बनाने का लिया संकल्प सीधी (मध्यप्रदेश), 12 जुलाई 2026। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में जिला सीधी के ग्राम कुरचू में अगरिया समाज जिला विकास अभियान का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री अमरशाह अगरिया तथा उनकी पूरी जिला टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, मातृशक्ति, युवा एवं कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, नशामुक्त, आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना तथा फाउंडेशन की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना रहा। कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 🌻समाज को संगठित करने पर विशेष जोर🌻 बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे प्रत्येक गांव में जाकर अधिक से अधिक परिवारों को फाउंडेशन से जोड़ें तथा समाज क...

अगरिया जनजाति मे धुर्वे गोत्र, परम्परा, इतिहास, संस्कृति 💥

💥 अगरिया जनजाति मे धुर्वे गोत्र, परम्परा, इतिहास💥 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌴🌴🌴🌴 अगरिया जनजाति में धुर्वे (धुर्वा/धुर्वे) गोत्र एक महत्वपूर्ण गोत्र माना जाता है। हालांकि अगरिया जनजाति के सभी गोत्रों का लिखित इतिहास बहुत कम उपलब्ध है और अधिकांश जानकारी लोकपरंपराओं, मौखिक इतिहास तथा मध्य भारत की आदिवासी सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। इसलिए धुर्वे गोत्र के संबंध में उपलब्ध जानकारी को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकविश्वासों के आधार पर समझना चाहिए। 👉 धुर्वे गोत्र का परिचय🌱 धुर्वे गोत्र मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ आदिवासी समुदायों में पाया जाता है। अगरिया जनजाति में भी धुर्वे गोत्र के परिवार मिलते हैं। 👉 "धुर्वे" शब्द की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न मत हैं—💥 💥 ध्रुव (स्थिरता) से संबंध :– कुछ विद्वान धुर्वे शब्द को संस्कृत के "ध्रुव" शब्द से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ अटल, स्थिर या दृढ़ होता है। 🌴 वनस्पति या प्राकृतिक प्रतीक से संबंध :– आदिवासी परंपराओं में कई गोत्र किसी वृक्ष, पशु, पक्षी या प्राकृतिक तत्व प...

अगरिया जनजाति का पोर्ते (Porte) गोत्र – उत्पत्ति, इतिहास, टोटम एवं सामाजिक महत्व

अगरिया जनजाति का पोर्ते (Porte) गोत्र – उत्पत्ति, इतिहास, टोटम एवं सामाजिक महत्व 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 अगरिया जनजाति में पोर्ते (Porte) एक प्रतिष्ठित और प्राचीन गोत्र माना जाता है। यह गोत्र विशेष रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। पोर्ते गोत्र के लोग अपने सामाजिक अनुशासन, प्रकृति-पूजा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए जाने जाते हैं। ध्यान दें: अगरिया जनजाति की गोत्र परंपराएँ मुख्यतः मौखिक परंपरा पर आधारित हैं। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में इनके बारे में अलग-अलग मान्यताएँ मिल सकती हैं। 1. पोर्ते गोत्र की उत्पत्ति "पोर्ते" शब्द की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न स्थानीय मान्यताएँ प्रचलित हैं। कुछ बुजुर्गों के अनुसार "पोर्ते" शब्द का संबंध किसी प्राचीन कुल-पुरुष या वीर पूर्वज से माना जाता है। कुछ स्थानों पर इसे जंगल और प्रकृति से जुड़े एक पारंपरिक कुल का नाम माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार यह गोत्र उन परिवारों से विकसित हुआ जो लौह प्रगलन (Iron Smelting) कार्य में दक्ष थे और ...

अगरिया जनजाति का चिरई गोत्र : इतिहास, उत्पत्ति, टोटम परंपरा और सांस्कृतिक महत्व

अगरिया जनजाति का चिरई गोत्र : इतिहास, उत्पत्ति, टोटम परंपरा और सांस्कृतिक महत्व 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 अगरिया जनजाति भारत की प्राचीन लौह-प्रगलक (Iron Smelter) जनजातियों में से एक है। इस जनजाति की पहचान केवल पारंपरिक लौह शिल्प से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध सामाजिक व्यवस्था, गोत्र प्रणाली, प्रकृति-पूजा और सांस्कृतिक विरासत से भी होती है। अगरिया समाज में गोत्र केवल एक पारिवारिक पहचान नहीं है, बल्कि यह पूर्वजों, प्रकृति, सामाजिक अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। इन्हीं प्रमुख गोत्रों में चिरई गोत्र का विशेष स्थान माना जाता है। यह गोत्र पक्षियों के प्रति सम्मान, प्रकृति संरक्षण और टोटम परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। महत्वपूर्ण सूचना: चिरई गोत्र के बारे में उपलब्ध अधिकांश जानकारी लोकपरंपराओं, मौखिक इतिहास और समाज के बुजुर्गों द्वारा संरक्षित परंपराओं पर आधारित है। इसके विस्तृत ऐतिहासिक अभिलेख अभी सीमित हैं, इसलिए जहाँ लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ जानकारी को लोकमान्यता के रूप में समझा जाना चाहिए। 🌴गोत्र क्या होता है?🌴 गोत्र किसी परिवार ...

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन ll दिनांक - 6 जुलाई 2026

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन सिंगरौली (मध्यप्रदेश)। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के तत्वावधान में 06 जुलाई 2026 को जिला सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में "अगरिया समाज जिला विकास अभियान" का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार अगरिया एवं उनकी पूरी टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्तियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं नशामुक्त बनाने के साथ-साथ समाज की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का संरक्षण करना था। बैठक में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई। 📌 समाज के विकास के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखि...