💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास का संस्था लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे ज़िला अनूपपुर ब्लॉक कोतमा के ग्राम टिकईटोला मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 12/06/2024 को हुआ ll कार्यक्रम मे ज़िला अनूपपुर,उमरिया, शहडोल, सीधी, सिंगरौली (मध्यप्रदेश) एवं कोरिया (छत्तीसगढ़)जिलों के कार्यकर्ता, पदाधिकारी शामिल हुए ll अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम के लिए फाउंडेशन द्वारा अन्य जिले से नोडल कार्यकर्ता अधिकारी की नियुक्ति की गयी थी जिनके मुख्य अतिथ्य मे कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ll फाउंडेशन द्वारा अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का उद्देश्य अगरिया जनजाति समाज को संगठित करना, अगरिया जनजाति का संरक्षण, समाज की संस्कृति का संरक्षण करना, समाज मे बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना, तथा शिक्षा मे सहयोग करना, विवाह मे सहयोग करना, इलाज मे सहयोग करना, दशगात्र मे सहयोग करना तथा समाज को नशा मुक्त समाज बनाना तथा समाज से रूढ़िवादी विचार को समाप्त करना एवं ऐसे समस्त फाउंडेशन द्वारा समाज के लिए चलाये जा रहे मुहीम से अगरिया जन समुदाय को अवगत कराना है और...