💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
असुर भाग -2 असुर भाग -1 का लिंक 👇👇👇👇👇दिया हैं जरूर पढ़े 👇👇👇👇👇👇👇👇👇 असुर भाग -1 का लिंक http://www.agariyajanjati.in/2021/04/asur-asur-wikipidia.html यह सत्य बात हैं की असुरो तथा लोहे के मध्य गहरा और करीबी सम्बन्ध नहीं रहा हैं परन्तु थोड़ा बहुत सम्बन्ध तो हैं ही ll श्री राय हमें बताते हैं की क़िस प्रकार मुंडा समुदाय के लिए प्राचीन भयानक लम्बे चौड़े असुरो को पुंडी या सफेद रंग के लोगो को भव्य, बालिष्ठ तथा चंचल बताया गया हैं l जो की सिर्फ एक रात मे लम्बे लम्बे डग भरकर सैकड़ो मील दूसरे गांव मे नृत्य मे भाग लेकर, सुबह होने से पहले वापस अपने घर लौट आते थे ll ऐसा कहा जाता हैं की वे ईंटो से बने बड़े भव्य मकानों मे रहा करते थे तथा अधिकांश समय ताम्बा या लोहा बनाने मे व्यस्त रहा करते थे और परंपरा यहाँ तक बतलाती हैं की वे लोहा खाते थे और अपनी तेज फूंक से आग आग प्रज्वलित कर लिया करते थे ll इस प्रकार लोहा खाने की शक्ति पहले अगरिया चारित्रिक विशेषता थी ll इस प्रकार आगयुक्त अनेको प्रकार के खाने तथा उनके विशर्जन की अनेको तथा किवदान्तियो मे वर्णित की गयी हैं ll इसके विपरीत ...