💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
नागरिको के लिए मौलिक कर्तव्य क्या है - 1 - संविधान का पालन करे और उसके आदर्शो ,संस्थाओ राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे। २- स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को ह्रदय में संजोय रखे और उसका पालन करे। 3 -भारत की सम्प्रभुता ,एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण बनाये रखे। 4 -देश की रक्षा करे और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करे। 5 -भारत के सभी लोगो में समरसता और समान बंधुत्व की भावना का निर्माण करे। 6 -हमारी मिश्रित संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझे और उसका परिक्षण करे। 7 -प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करे। 8 -वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करे। 9 -सार्वजानिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे। 10 -व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रो में उत्कर्ष की ओर बढ़ने सतत प्रयास करे। 11 -6 वर्ष की आयु से 14 वर्ष की आयु के बच्चो के माता - पिता और संरक्षक जो भी हो , उन्हें शिक्षा के अवसर प्रदान करे।...