🔥 ⛏️ अगरिया जनजाति: भारत की प्राचीन लौह वैज्ञानिक एवं आदिम आदिवासी विरासत ⛏️🔥 🙏 सेवा जोहार साथियों! अगरिया जनजाति भारत की एक प्राचीन, वैज्ञानिक एवं गौरवशाली आदिम आदिवासी जनजाति है, जो मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी एवं सिंगरौली जिलों सहित छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में निवास करती है। "अगरिया" शब्द की उत्पत्ति "आग" अथवा "अग्नि" से मानी जाती है, क्योंकि इस समाज का जीवन, संस्कृति और परंपराएँ आग की भट्टी तथा लोहे के इर्द-गिर्द विकसित हुई हैं। ⚒️ भारत के प्राचीन लौह शिल्पकार अगरिया समाज को भारत के सबसे प्राचीन धातुकार समुदायों में गिना जाता है। हमारे पूर्वज जंगलों और पहाड़ियों से लौह अयस्क एकत्रित कर मिट्टी की पारंपरिक भट्टियों एवं लकड़ी की धौंकनी (फुकनी) की सहायता से शुद्ध लोहा तैयार करते थे। 🔸 हल का फाल 🔸 कुल्हाड़ी 🔸 हांसिया 🔸 कृषि एवं दैनिक उपयोग के अनेक औजार इनके द्वारा निर्मित औजार अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। 🔥 लोहासुर देव: हमारे आराध्य अगरिया समाज के प्रमुख द...
मध्यप्रदेश में कितनी जनजातियां निवास करती है लगभग 24 जनजातियाँ मध्यप्रदेश में निवास करती है। इनकी उपजातियो को मिलाकर इनकी कुल संख्या 90 है। मध्यप्रदेश में लगभग 1.53 करोड़ जनसँख्या इन जनजातियों की है। जो अब भी भारत की सर्वाधिक है।