अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न रायगढ़ ज़िला मे ll दिनांक - 21/12/2025 दिन रविवार को ll 👇 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे जिलों जिलों मे "अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम"फाउंडेशन से जुड़े सभी राज्यों के जिलों जिलों मे चलाया जा रहा है ll "अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का आरम्भ 15 नवंबर अगरिया जनजाति गौरव दिवस ( फाउंडेशन 6वा स्थापना दिवस) से किया गया है ll जिसका मुख्य उद्देश्य फाउंडेशन द्वारा समाज के उत्थान विकास मे चलाये जा रहे मुख्य गतिविधियों को समाज के अंतिम छोर मे पहुँचाना जिससे समाज का हर स्वजातीय बंधु ये समझ सके की लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन समाज के उत्थान विकास के लिए सतत कार्यरत है और समाज से सम्बंधित सभी प्रकार की समस्याओ के लिए संस्था सतत कार्य कर रहा है ll इसके अलावा फाउंडेशन के इस अभियान का उद्देश्य जिले मे फाउंडेशन को मजबूत बनाना है ll इस अभियान को समाज के लिए लाने का एक मकसद ये भी था की जो कार्यकर्त्ता संस्था से जुड़े है उनको संस्था द्वारा समाज के लिए चलाये जा रहे सभी योजनाओ की जा...
अगरिया मध्य भारत के वे आदिवासी समुदाय है जो लोहा गलाने यानि की लौह प्रगलक का कार्य करते है उनका मुख्य व्यवसाय लोहे से जुड़ा होता है अगरिया अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आते है। अगरिया समुदाय पत्थर से लोहा गलाते है लेकिन वर्तमान में पत्थर पर सरकार द्वारा रोक लगाया गया है जिससे उनका व्यवसाय काफी प्रभावित है। अतः अगर वर्तमान की बात करे तो अगरिया समुदाय इस समय अपने क्षेत्र में जिस ग्राम या परिवेश में रह रहे है वही के लोगो का उपयोग की सामग्री बनाकर उनको देते है तथा अपने किसानो का (जिनके ऊपर वे आश्रित है ) समबन्धी समस्तलोहे का कार्य करते है एवं अपने मेहनत का पैसा या खाद्यान्न लेकर अपने एवं अपने बच्चो का पालन पोषण कर रहे है। अगरिया समुदाय की पहचान अभी भी कई जगह में एक समस्या है है कई जगह उनको गोंड भी कह दिया जाता है ,लेकिन ऐसा कहना किस हद तक सही है पर ,हां अगरिया को गोंडो का लोहार जरूर कहा जाता है लेकिन वास्तव में में अगरिया गोंड नहीं है बल्कि गोंडो की उपजाति है। अगरिया मध्य भारत के लोहा पिघलाने वाले और लोहारी करने वाले लोग है जो अधिकतर मैकाल पहाड़ी क्षेत...