अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
अगरिया समाज की बैठक सिंगरौली मे संपन्न हुआ (लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ll
सिंगरौली मध्यप्रदेश मे दिनांक 07/05/2023 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे अगरिया जनजाति समाज की बैठक संपन्न हुई ll जहाँ अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास के सम्बन्ध मे शपथ ग्रहण एवं एजेंडा वाचन हुआ ll राष्ट्रीय संघ द्वारा नियुक्त माननीय नोडल महोदय श्री बीरबल अगरिया जी द्वारा संघ द्वारा प्रदाय एजेंडा को उपस्थित समस्त उपस्थित स्वजातीय बंधुओ को बिंदुवार पढ़कर बताया गया ll समाज मे शिक्षा को लेकर चर्चा हुआ जहाँ समाज मे बच्चों को शिक्षित करने हेतु बच्चों को सहयोग देना, समाज मे नशा का लेनदेन बंद करना, समाज मे नशापान करके बैठने ओर प्रतिबंधित करने, अगरिया समाज को संगठित करने करने तथा समाज को एक विचार धारा मे चलने तथा अगरिया जनजाति को संरक्षित करने तथा अगरिया जनजाति के स्तर रहन सहन को देखते हुए अगरिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति मे सम्मिलित करने हेतु मध्यप्रदेश सरकार से मांग पर चर्चा हुआ ll इसके अलावा सभी को बताया गया की लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का उद्देश्य समाज के अंतिम छोर मे खड़े अगरिया समाज के व्यक्ति को संगठन से जोड़ना हैं ...