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रायगढ़ के गेरवानी में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त और नशामुक्त बनाने का संकल्प एवं फाउंडेशन के सभी गतिविधियों मे सक्रिय भागीदारी निभाने पर चर्चा ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृव मे

रायगढ़ के गेरवानी में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त और नशामुक्त बनाने का संकल्प एवं फाउंडेशन के सभी गतिविधियों मे सक्रिय भागीदारी निभाने पर चर्चा ll ​ रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में दिनांक 21 जून 2026 को जिला रायगढ़ के ग्राम गेरवानी में 'अगरिया समाज जिला विकास अभियान' कार्यक्रम का गरिमामयी संपादन हुआ। यह पूरा कार्यक्रम जिलाध्यक्ष उबरन अगरिया एवं उनकी पूरी टीम के कुशल मार्गदर्शन और रणनीतिक नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। ​इस महत्वपूर्ण बैठक में फाउंडेशन के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने, जिले में इसकी गतिविधियों को और अधिक मजबूत बनाने तथा समाज के उत्थान के लिए कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष रणनीति तैयार की गई। ​📌 इन मुख्य बिंदुओं पर हुआ गहन मंथन ​कार्यक्रम के दौरान समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े कई गंभीर और प्रगतिशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई: ​ सक्रिय भागीदारी: फाउंडेशन की आगामी गतिविधियों जैसे अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन 7वा स्थ...

सबसे पहले लोहा किसने बनाया ll सर्वप्रथम लोहा का अविष्कार खोज किसने किया ll

सबसे पहले लोहा बनाने वाली जनजाति "अगरिया जनजाति" है जिसने सबसे पहले लौह अयस्क की पहचान की और लौह अयस्क को भट्ठी मे डालकर पिघलाकर लोहा बनाया ll इसके साक्ष्य प्रमाण आज भी अगरिया जनजाति,अगरिया समाज के पास मिलता है चेपूआ जिससे भट्ठी को धौंका जाता है मिलता है और अगरिया जनजाति आज भी इस संस्कृति को अपनाया हुआ है ll आज के इस परिवेश मे भी अगरिया जनजाति लौह का प्रगलन लौह अयस्क के माध्यम से करता है ll सबसे पहले अगरिया जनजाति द्वारा लौह प्रगलन अगरिया जनजाति ने किया इसका साक्ष्य कई अंग्रेज लेखकों के पुस्तकों मे भी मिलता है ll अगरिया जनजाति पूर्व अनादिकाल से जंगल मे निवास करते हुए लोहा गलाता रहा है जिसका साक्ष्य आज भी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई जिलों के जंगलो मे भी देखने को आज भी मिलता है ll जहाँ लौह अयस्क टुकड़े,पिघले लोहे के छोटे छोटे टुकड़े, वो आधा टूटा हुआ भट्ठी  का गेरा जिसमे लौह अयस्क को डाल कर चेपूआ चलाया जाता है आज भी जंगलो मे मिलता है ll अगरिया जनजाति का कार्य व्यवसाय लोहा से जुडा हुआ है लोहा के औजार बनाना,घरेलु उपयोगी सामग्री बनाना, हथियार बनाना इत्यादि ll 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇...