अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
अगरिया समाज की सामाजिक मीटिंग संपन्न जिला कोरबा छ ग कोरबा के ग्राम सलिहापारा में। आज दिनांक 27 /01 /2022 को अगरिया समाज की स्थानीय मीटिंग जिला कोरबा के ग्राम सलिहापारा में संपन्न हुआ जहा कोरबा जिला के कई ग्राम से अगरिया समाज के सामाजिक बंधू उपश्थित हुए। बैठक में राष्ट्रिय संगठन अध्यक्ष श्री रामखिलावन अगरिया ,हरिहर सिंह अगरिया ,परदेशी अगरिया ,उमेंद सिंह अगरिया ,जान सिंह अगरिया ,घांसी राम अगरिया ,लखन सिंह अगरिया ,समर सिंह अगरिया ,कमल सिंह अगरिया और कुल पच्चीस गाँव के माताए ,बहने ,सामाजिक बंधू सम्मिलित हुए। बैठक में राष्ट्रिय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के उद्देश्यों पर चर्चा हुआ जहा समाज को शिक्षित करने ,समाज को नशा मुक्त बनाने ,समाज की व्यवस्था शादी विवाह ,गोत्र पर चर्चा हुआ एवं सभी को सामाजिक संगठन से जुड़ने हेतु कहा गया। बताया गया की समाज का विकास संगठित होने पर ही होगा, अलग अलग विचारधारा एवं समाज में अलगाव वाद को बढ़ावा नहीं देना है , ऐसे सामाजिक बंधू जो समाज में अलगाव लाये उनको समाज में दण्डित किया जाना चाहिए। बताया...