अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
अगरिया समाज संगठन भारत की दूसरी एनिवर्सरी बड़े धूम धाम से मनाया गया संगठन संचालक दशरथ अगरिया जी एवं अध्यक्ष श्री रामखिलावन रामखिलावन जी के नेतृत्व में दिनाँक 15 -11 -2021 को अगरिया समाज संगठन भारत का दूसरा वर्षगांठ संगठन के समस्त कार्यकर्ताओ ने बड़े उत्साह पूर्वक मनाया संगठन की समस्त महिला शक्तिया एवं पुरुष कार्यकर्त्ता साथिओ ने सभी को एक दुसरे को संगठन के वर्ष गाँठ की बधाईया दिए। तथा दूसरी ओर संगठन के सभी जिलाध्यक्ष ,जिलाकार्यकर्ता महिला /पुरुष सभी ने संगठन के वर्षगाँठ की बधाईया वाले पोस्टर अपने फोटो लगाकर संगठन से बनवाते हुए , सभी कार्यकर्ताओ ने पोस्टर को अपने व्हाट्सप्प प्रोफाइल पिक्चर ,स्टेटस में शेयर किये तथा फेस बुक ,टेलीग्राम, ट्विटर पर हर जगह अपने संगठन वर्षगांठ पोस्टर शेयर किये , वही दूसरी ओर संगठन की समस्त महिला शक्तियों ने संगठन को नयी उचाई एवं आयाम देने के लिए तथा समाज को एक सूत्र में बाँधने एवं पूरे भारत के अगरिया जनजाति को एक मंच में आने यानि अगरिया समाज संगठन भारत से सभी को जुड़ने जोड़ने का सन्देश देने के लिए पूरे भार...