अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के मार्गदर्शन मे सूरजपुर छ.ग मे अगरिया समाज की मीटिंग एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम सम्पन्न ll
राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के मार्गदर्शन मे दिनांक -13/03/2022 को अगरिया समाज की मीटिंग एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ यू ट्यूब पर कार्यक्रम को देख सकते है 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 https://youtu.be/0zk05C9vQlM ll आपको अवगत कराना चाहुँगा की संगठन द्वारा निर्णय लिया गया था की मार्च महीना समाज एवं संगठन के लिए कुछ अलग होगा जहाँ समाज के जमीनी स्तर के विकास के लिए संगठन अंतर्गत राज्यों के हर जिले मे मीटिंग एवं साथ मे समाज के प्रति जागरूकता लाने के लिए सामाजिक बंधुओ को शपथ ग्रहण कराया जायगा जिसमे मीटिंग का एजेंडा एवं शपथ प्रारूप राष्ट्रीय स्तर से प्रदाय किये जायेगे और ये सारे कार्यक्रम प्रत्येक जिले मे अन्य जिले से नियुक्त नोडल कार्यकर्त्ता की उपस्थित मे होगा ll इसी के परिप्रेक्ष्...