💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
अगरिया जनजाति समाज का राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 दिनांक 24/09/2023 को जिला अनूपपुर के कोतमा (कुशा भाऊ ठाकरे मंगल भवन)मे लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन मे नेतृत्व मे संपन्न हुआ ll जहाँ अगरिया अगरिया समाज के राष्ट्रीय स्तर से कई राज्यों से तथा जिलों से कार्यकर्त्ता सम्मिलित हुए ll कार्यक्रम मे भागीदारी सुनिश्चित करने वाले राज्यों मे झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ रहे हैं जहाँ से कार्यक्रम मे सम्मिलित होने वाले जिलों के कार्यकर्त्ताओ मे झारखंड के गढ़वा से, सोनभद्र उत्तरप्रदेश से, कबीरधाम, कोरिया, रायगढ़ छत्तीशगढ़ से एवं मध्यप्रदेश से अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी सिंगरौली, शहडोल जिलों के कार्यकर्त्ता उपस्थित हुए ll संस्था के मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ अगरिया कोतमा ने बताया की अगरिया समाज राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 का उद्देश्य अगरिया जनजाति को संरक्षित करना, अगरिया जनजाति के संस्कृति को संरक्षित करना, अगरिया जनजाति के इतिहास जो की एक वैज्ञानिक इतिहास हैं जिसने इस दुनिया मे सर्वप्रथम लौह अयस्क (लौह पत्थर)की पहचान किया तथा परंपरागत तरीके से अपने संस्क...