अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
भारत का संविधान उद्देशिका हम ,भारत के लोग ,भारत को एक [ सम्पूर्ण प्रभुत्व -संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य ] बनाने के लिए ,तथा उसके समस्त नागरिको को : सामाजिक ,आर्थिक और राजनैतिक न्याय , विचार ,अभिव्यक्ति ,विशवास ,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता , प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए , तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और [राष्ट्र की एकता और अखंडता ] सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए ढृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर ,1949 ई. को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित करते है।