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अगरिया जनजाति से जुड़ी ख़ास बाते एवं उनका रहन सहन

अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...

विधायक पंडरिया को ज़िला इकाई कबीरधाम छ.ग की टीम ने ज्ञापन सौपा ll अगरिया जनजाति की समस्याओ को लेकर ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन

आज दिनांक 05/01/2025 को ज़िला इकाई कबीरधाम छत्तीसगढ़ लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की टीम ने ज़िला कबीरधाम छत्तीसगढ़ के ब्लॉक पंडरिया विद्यायक माननीय श्री मति भावना बोहरा जी को ज्ञापन सौपे  अगरिया जनजाति की समस्याओ को लेकर ll  अगरिया जनजाति समाज जो की आदिम काल की जनजाति जिनकी संस्कृति वास्तव मे आज किसी नाम, पहचान की मौताज नहीं है लेकिन ये इस समाज का दुर्भाग्य है की ये अगरिया जनजाति समाज आज सबसे पिछड़ा समाज है, समाज आज शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी हर स्तर से पिछड़ा हुआ है ll अगरिया जनजाति समाज जिसकी संस्कृति लौह अयस्क से लोहा बनाना है ये वही जनजाति है जिसने लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म दिया, सबसे पहले इस जनजाति ने जंगल मे रहते हुए लौह अयस्क (लौह पत्थर) को पहचाना और पारम्परिक तरीके से लोहा बनाया और इस देश दुनिया समाज को लोहा जैसे चमत्कारी धातु से अवगत करायाll आज अगरिया जनजाति समाज की संस्कृति को अपना कर कई बड़े बड़े कंपनी लोहा बना रहे है ll लेकिन इस लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म देने वाली जनजाति अगरिया जनजाति ही है ll ऐसा वैज्ञानिक अगरिया जनजाति समाज जिसका इस देश समाज ...

अगरिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल किये जान एवं भूमि आवंटन को लेकर ज़िला इकाई अनूपपुर की टीम ने सौपा ज्ञापन ज़िला कलेक्टर अनूपपुर को

आज दिनांक 02.01.2025 को अगरिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल किये जाने एवं 15 नवंबर अगरिया जनजाति गौरव दिवस दिवस घोषित किये जाने को लेकर माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं अनुसूचित जनजाति आयोग आयोग मध्यप्रदेश के नाम ज़िला कलेक्टर अनूपपुर को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन ज़िला इकाई अनूपपुर की ओर से ज्ञापन सौपा गया ll  ज्ञापन के दौरान जिला अनूपपुर कलेक्टर महोदय से अगरिया जनजाति के अस्तित्व एवं स्थिति को देखते हुए अगरिया जनजाति सामुदायिक भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटन के लिए भी चर्चा किया गया एवं आवेदन भी दिया गया ll ज़िला इकाई अनूपपुर लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के टीम के द्वारा माननीय कलेक्टर महोदय से यह भी चर्चा किया गया की अगरिया जनजाति आज शैक्षिक, व्यावसायिक एवं नौकरी मे हर स्तर से पिछड़ा हुआ है यदि भवन के लिए अगरिया समाज को भूमि आवंटित हो जाता है तो अगरिया समाज सामुदायिक भवन निर्माण करा कर अगरिया जनजाति भी अपने समाज के विकास के लिए समाज को जागरूक कर पायेगा जिससे अगरिया जनजाति भी अन्य समाज की तरह सशक्त और शिक्षित हो पायेगा ll उक्त चर्चा के...