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सितंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अगरिया जनजाति से जुड़ी ख़ास बाते एवं उनका रहन सहन

अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...

ए टी एम् जारी होते ही हो जाता है पांच लाख बीमा

ए टी एम् जारी होते ही हो  जाता है  पांच लाख  बीमा  बैंको में ए टी एम् धारको का होता है दुर्घटना बीमा  किसी भी राष्ट्रीकृत या गैर राष्ट्रीकृत बैंक के उपभोक्ता ने यदि बैंक से ए टी एम् जारी करवाया है तो ए टी एम् जारी होते ही उस उपभोक्ता का 25000 से लेकर 5 लाख तक का दुर्घटना बीमा बैंक ने करवाया है।  यह जानकारी 99 % उपभोक्ताओं को नहीं है इतना ही नहीं बीमा योजना बिना कोई राशि जमा किये विकलांगता से लेकर मौत होने तक के मुआवजे का प्रावधान है।  बैंको में ए टी एम् धारको के लिए बीमा योजना प्रारम्भ हुए कई साल हो गए लेकिन आज तक लोगो को इस बात की जानकारी तक नहीं है और ना ही बैंक अधिकारी कर्मचारी कभी अपने ग्राहकों को यह बताते है। बैंको के ए टी एम् उपयोग करने वाले उपभोक्ता की यदि किसी दुर्घटना में मौत होती है तो उसके परिजन नियमानुसार मुआवजा पाने के अधिकारी हो जाते है।  लेकिन यह बात ज्यादातर लोगो को पता नहीं होती और बैंक आश्रितों को मिलने वाली राशि दबा लेती है।  इस स्थिति में ए टी एम् धारक को मिलता है लाभ  * दुर्घटना में एक हाथ और पैर से विकलांग होने पर 5...

जनजाति की विशेषता

  जनजाति की विशेषता :- 1 - सामान्य भाषा -प्रत्येक जनजाति की अपनी एक भाषा होती है , जिसके माध्यम से ये अपने अपने विचारो को व्यक्त करते है। जनजातियाँ प्रायः स्थानीय बोलियों का प्रयोग करते है।  2 -एक नाम -प्रत्येक जनजाति अपने नाम से पहचानी जाती है जनजाति के सदस्य अपने नाम से ही अपना परिचय प्रस्तुत करते है। जैसे -अगरिया ,गोंड ,बैगा आदि  3 -निश्चित भू भाग -जनजाति एक निश्चित भू भाग में निवास करती है।  एक निश्चित भू भाग में निवास करने के कारन ही जनजातियों में सामान्य जीवन की विशेषताएं विकसित हो  जाती है। इनकी संस्कृति ही इनकी पहचान है। जैंसे अगरिया छत्तिश्गढ़ में छोटा नागपुर के पठार एवं मध्यप्रदेश में डिंडोरी से नेतरहाट  या अमरकंटक जैसे कई क्षेत्रो में रेखांकित किया जा सकता है। बैगा जनजाति का बैगाचक क्षेत्र ,भरिया जनजाति का पातालकोट क्षेत्र ,माडिया जनजाति का अबूझमाड़ क्षेत्र।  निश्चित भू भाग जनजातियों की विशिष्ट पहचान है।  4 -सामान्य संस्कृति -प्रत्येक जनजाति अपनी विशिष्ट संस्कृति से जानी जाती है।  किन्तु एक ही जनजाति के सभी सदस्यों में एक सा...

जनजाति से आशय ,जनजाति क्या है ,जनजाति किसे कहते है

  जनजाति से आशय- भारतीय समाज  में जनजाति से  आशय वन्य जाती ,आदिवासी ,वनवासी, आदिमजाति गिरिजन आदि से है ,ये जनजाति ऐसे लोगो का समूह या समुदाय है जो आज भी जंगलो में निवास करते है। प्राकृतिक साधनो से ही अपना भोजन ग्रहण  करते है। आधुनिक सभ्य समाज से दूर रहते है तथा शिक्षा ,कृषि ,उद्योग धंधे आदि से अपरिचित है।  भारत की जनगणना 1991 के अनुसार -ये अपने सीमित साधनो से केवल जीवित रहना ही सीख सके है और आज भी विज्ञान  की इस चका चौंध व सभ्यता की होड़ से अपरिचित है। ऐसे ही अपरिचित लोगो का उल्लेख भारतीय संविधान में अनुसूचित आदिम जनजाति या जनजाति (ट्राइबल ) के अंतर्गत किया जाता है। " भारतीय इतिहास  में यदि बात करे तो आदिवासी समूह का वर्णन प्राचीन समय से मिलता है। डॉ श्री नाथ शर्मा जी  जनजातीय अध्यन के अनुसार -"भारतीय समाज में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक आदि समूहों एवं वनवासियों का उल्लेख प्राप्त होता रहा है। वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल तथा महाकाव्य काल में जनजातियों के नाम भी उल्लेखित है। जनजाति या आदिम जाती अथवा आदिवासी ट्राइब्स  tribes शब्द का हिंदी रूपां...