अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
दिनांक 27/08/2023 को ग्राम अमलाडीह ब्लॉक पोड़ी उपरोड़ा जो की जिला कोरबा छत्तीशगढ़ मे आता हैं ll अगरिया समाज का बैठक लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के माननीय डायरेक्टर महोदय श्री रामखिलावन अगरिया जी, कार्यकर्त्ता दुबराज सिंह अगरिया जी, उमेंद अगरिया जी, पोराशाय अगरिया जी की मुख्य आयोजन मे संपन्न हुआ इसके आलावा कई स्वजातीय बंधु एवं माताए बहने कार्यक्रम मे उपस्थित रहे llअगरिया जनजाति समाज को एक करने वाला मंच लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 को लेकर जो की जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश के कोतमा मे दिनांक 24/09/2023 को संपन्न होना हैं उक्त के सम्बन्ध मे बैठक का आयोजन हुआ ll जहाँ बैठक मे उपस्थित समस्त स्वजातीय बंधुओ माताओ बहनो को कार्यक्रम मे सम्मिलित होने हेतु कहा गया ll एवं संगठन जो की समाज के उत्थान विकास के लिए हैं जिसका निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर किया गया हैं जिनके गतिविधियों के आयोजन हेतु सामाजिक सहयोग की भी बात रखी गयी जहाँ बैठक मे उपस्थित समस्त स्वजातीय बंधुओ ने अपने सहमति दर्ज की और राष्ट्रीय महासम्मेलन 2023 कार्यक्रम मे सम्मिलित होने एवं अ...