💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
इलाज हेतु सहयोग राशि प्रदान किया गया सीधी के सुखलाल अगरिया जी को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन द्वारा ll
इलाज हेतु सहयोग राशि प्रदान किया गया सीधी के सुखलाल अगरिया जी को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन द्वारा ll 👇🏻 जानिए क्या हैं पूरा मामला बीते दिन 17/02/2023 को सीधी जिला निवासी सुखलाल अगरिया जी जो. की शादी मे सम्मिलित होने पूरे परिवार सहित कोरिया जिला गए हुए थे वही अचानक देर रात लगभग 12 बजे से उनका छोटा पुत्र जो लगभग 1 साल का होगा अचानक से उल्टी - दस्त करना सुरु कर दिया काफी प्रयास के बाद भी कोई सुधार नहीं आया ll सुखलाल जी बच्चे को लेकर अपने गृह ग्राम सीधी आ गए वहां दो दिन इलाज कराये लेकिन बच्चे के तबियत मे कोई सुधार नहीं आया फिर उनके द्वारा अपने ससुराल की ओर बच्चे को लेकर प्रवास किया गया जहा पर प्राइवेट अस्पताल मे इलाज कराया गया तो जाकर बच्चे मे धीरे धीरे आराम हुआ और अभि बालक लगभग पूरी तरह स्वस्थ्य हैं ll लेकिन इस दौरान सुखलाल अगरिया जी का काफी खर्च हुआ ll और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हैं प्रतिदिन मजदूरी कर के अपना एवं परिवार के भरण पोषण करते थे ऐसे स्थिति मे उनके सामने एक चुनौती हो गयी थी की आगे का इलाज कैसे पूरा कराये पूरे रास्ते बंद हो गए थे वास...