अगरिया जनजाति का पोर्ते (Porte) गोत्र – उत्पत्ति, इतिहास, टोटम एवं सामाजिक महत्व 🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩 अगरिया जनजाति में पोर्ते (Porte) एक प्रतिष्ठित और प्राचीन गोत्र माना जाता है। यह गोत्र विशेष रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। पोर्ते गोत्र के लोग अपने सामाजिक अनुशासन, प्रकृति-पूजा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए जाने जाते हैं। ध्यान दें: अगरिया जनजाति की गोत्र परंपराएँ मुख्यतः मौखिक परंपरा पर आधारित हैं। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों में इनके बारे में अलग-अलग मान्यताएँ मिल सकती हैं। 1. पोर्ते गोत्र की उत्पत्ति "पोर्ते" शब्द की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न स्थानीय मान्यताएँ प्रचलित हैं। कुछ बुजुर्गों के अनुसार "पोर्ते" शब्द का संबंध किसी प्राचीन कुल-पुरुष या वीर पूर्वज से माना जाता है। कुछ स्थानों पर इसे जंगल और प्रकृति से जुड़े एक पारंपरिक कुल का नाम माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार यह गोत्र उन परिवारों से विकसित हुआ जो लौह प्रगलन (Iron Smelting) कार्य में दक्ष थे और ...
जिला उमरिया के ग्राम बोदली मे अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का प्रथम चरण सम्पन्न हुआ ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ll
ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम 2025 का प्रथम चरण ग्राम बोदली मे संपन्न हुआ ll 👇 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ज़िला उमरिया के ग्राम बोदली मे, उमरिया जिले का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का प्रथम चरण सम्पन्न हुआ ll दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई के मध्य मे रखा जायेगा ll फाउंडेशन की ओर से जिलों के कार्यकर्त्ताओं से फाउंडेशन से जुड़ने एवं फाउंडेशन सम्बंधित गतिविधियों को जिलों मे पहुंचाने एवं जिलों को मजबूत बनाने के लिए फाउंडेशन अंतर्गत सभी जिलों मे अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का आयोजन दो चरण मे करावाया जाता है ll पहला चरण माह दिसंबर - जनवरी के मध्य मे 1 दिन एवं दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई मे सम्पन्न होना है ll उक्त फाउंडेशन के निर्देशनुसार ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम दिनांक 25/01/2026 को संपन्न हुआ ll बैठक मे कई जिले से सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे एवं निम्नलिखित बिन्दुओ पर चर्चा हुआ ll 1- माह - फाउंडेशन द्वारा जिलों मे निर्धारित मार्च एवं अप्र...