शहडोल सांसद माननीय श्री मति हिमाद्री सिंह जी से जी मिलकर मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ प्रसाद अगरिया एवं कार्यकर्त्ता अनूपपुर अगरिया समाज की समाज की समस्याओ को लेकर ज्ञापन सौपे ll सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अगरिया जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर 2026)

🌿🔥 जब होगा सबका साथ, तभी होगा समाज का विकास 🔥🌿 जय अगरिया 🚩 जय लोहासुर 🔥 जय अंगार मोती 🙏 आइये मिलकर बढ़ायें एक कदम समाज की ओर… 🏹 15 नवम्बर 2026 🏹 अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन 7वाँ स्थापना दिवस) अगरिया जनजाति का गौरव केवल हमारे इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, मेहनत, स्वाभिमान और वैज्ञानिक विरासत में जीवित है। हमारी पहचान उस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है, जिसमें हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों के ज्ञान के आधार पर लौह प्रगलन तकनीक जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी परंपरा को विकसित किया और आगे बढ़ाया। इसी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और पहचान को सम्मान देने के लिए 15 नवम्बर 2026 को कोतमा में अगरिया जनजाति गौरव दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाएगा। यह अवसर लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के 7वें स्थापना दिवस का भी गौरवपूर्ण अवसर है। ✨ यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है… यह हमारी पहचान को याद करने का दिन है। यह हमारी विरासत पर गर्व करने का दिन है। यह अपनी संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दिन है। यह समाज के हर वर...

शहडोल सांसद माननीय श्री मति हिमाद्री सिंह जी से जी मिलकर मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ प्रसाद अगरिया एवं कार्यकर्त्ता अनूपपुर अगरिया समाज की समाज की समस्याओ को लेकर ज्ञापन सौपे ll

आज दिनांक 26/11/2025 को लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन मैनेजिंग डायरेक्टर (संस्थापक) दशरथ प्रसाद अगरिया जी एवं ज़िला अनूपपुर मप्र के कार्यकर्त्ता साथियों ने अगरिया समाज की समस्याओ को लेकर ज्ञापन सौपे ll
 फाउंडेशन मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ प्रसाद अगरिया द्वारा बताया गया की अगरिया जनजाति समाज आदिम काल की वह जनजाति समाज है जिसने सर्व प्रथम इस दुनिया मे लौह अयस्क की पहचान किया तथा पारम्परिक तरीके से लौह अयस्क को गलाकर लोहा बनाया ll
 अगरिया जनजाति एक वैज्ञानिक जनजाति समाज है क्योंकि पारम्परिक तरीके से सर्वप्रथम लोहा बनाने वाली जनजाति समाज अगरिया जनजाति समाज है ll यह जनजाति समाज पूर्व मे जंगलो मे निवास करता रहा है और अपने लोहा बनाने की पारम्परिक तकनीक के साथ लोहा बनाते हुए उसी लोहा से क़ृषि उपयोगी सामग्री, घरेलु एवं अन्य उपयोगी औजार बनाकर अपना जीवन यापन करते रहे है ll लेकिन जैसे जैसे सरकार द्वारा लौह अयस्क पर बैन ( प्रतिबन्ध) लगा व्यवसाय इस समाज का छिन सा गया और ये गांव गांव मे जाकर अपने रोजी रोटी मे लोहा का काम करके जीवन यापन करने लगे जिससे समाज मे शिक्षा, व्यावसाय, नौकरी तो बिलकुल नहीं है और सामाजिक रहन सहन इस समाज का अत्यंत न्यून है ll उपरोक्त समस्त बातो को माननीय सांसद महोदय को जानकारी देते हुए अगरिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG)मे शामिल किये जाने को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग मंत्रालय भारत सरकार, अनुसूचित जनजाति आयोग मध्यप्रदेश एवं माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के नाम ज्ञापन सौपा गया एवं ये भी अनुरोध किया गया है की संसद सत्र एवं विधान सभा सत्र मे अगरिया जनजाति समाज की वैज्ञानिक जनजाति का इतिहास बताते हुए एवं इस समाज का इस देश दुनिया मे योगदान ( लौह अयस्क से लोहा बनाने की संस्कृति) के बारे मे जानकारी देते हुए अगरिया जनजाति के पिछड़ेपन को लेकर मुद्दा उठाया जाय जिससे  इस समाज को pvtg (विशेष पिछड़ी जनजाति) का दर्जा मिल सके और ये समाज भी अन्य समाज की तरह सशक्त और बेहतर हो सके ll 
उक्त समस्त अगरिया समाज की समस्याओ को अवगत कराते हुए ज्ञापन सौपा गया एवं इसके अलावा भी अन्य कई मुद्दों एवं मांगो पर चर्चा हुआ ll
ज्ञापन सौपने ज़िला अनूपपुर अगरिया समाज से मिस बुद्धावती अगरिया, श्री महेश अगरिया, श्री सुखलाल अगरिया सहित कई स्वजातीय बंधु एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे ll

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