सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन ll दिनांक - 6 जुलाई 2026 सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अगरिया जनजाति की जनसंख्या एवं रहन सहन से जुड़ी जानकारी

💥अगरिया जनजाति : परिचय💥 अगरिया मध्यप्रदेश की एक अनुसूचित जनजाति है, जिसकी पहचान ऐतिहासिक रूप से लौह-अयस्क से पारंपरिक तरीके से लोहा गलाने और लोहे के औजार बनाने की तकनीक से जुड़ी रही है। ऐतिहासिक अभिलेखों में मध्यप्रदेश के अगरियों का विशेष उल्लेख मिलता है और अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, मंडला जैसे कई क्षेत्र में उनकी पारंपरिक लौह-कर्म परंपरा की एकाग्रता का उल्लेख किया गया है। � 📊 मध्यप्रदेश में अगरिया जनसंख्या✅ 2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसंख्या 41,243 थी, जिसमें: पुरुष — 20,706 महिलाएँ — 20,537 कुल परिवार — लगभग 9,609 लिंगानुपात — 992 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष बाल लिंगानुपात — 965 कुल साक्षरता — लगभग 43.9% ये आंकड़े 2011 Census के ST सांख्यिकीय प्रोफाइल से मेल खाते हैं; भारत सरकार के संसदीय दस्तावेज में भी मध्यप्रदेश के लिए अगरिया की संख्या 41,243 दी गई है। � 👉ध्यान दें:-  41,243 पुराना, 2011 का आधिकारिक जनगणना आंकड़ा है। वर्तमान 2026 की वास्तविक आबादी इससे अलग हो सकती है; नई पूर्ण जनगणना के बिना वर्तमान संख्या को निश्चित रूप...

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन ll दिनांक - 6 जुलाई 2026

सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: -शिक्षा, संगठन, संस्कृति और नशामुक्त समाज पर हुआ व्यापक मंथन
सिंगरौली (मध्यप्रदेश)।
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के तत्वावधान में 06 जुलाई 2026 को जिला सिंगरौली के ग्राम ककरसिहा में "अगरिया समाज जिला विकास अभियान" का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं नेतृत्व जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार अगरिया एवं उनकी पूरी टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्तियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगरिया समाज को संगठित, शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं नशामुक्त बनाने के साथ-साथ समाज की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का संरक्षण करना था। बैठक में समाज के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई।
📌 समाज के विकास के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श किया—
✅ फाउंडेशन की गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प:-
फाउंडेशन द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रत्येक गांव एवं प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया गया।
✅ नशामुक्त एवं कुप्रथा मुक्त समाज बनाने का आह्वान:-
समाज में व्याप्त नशाखोरी, अंधविश्वास एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। सभी उपस्थित सदस्यों ने नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया।
✅ महिला सशक्तिकरण एवं सम्मान:-
बैठक में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, शिक्षा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने पर विशेष चर्चा हुई। समाज के विकास में मातृशक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें प्रत्येक कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
✅ मैनेजिंग डायरेक्टर अगरिया समाज योजना की जानकारी:-
फाउंडेशन द्वारा संचालित 'दिवंगत सहयोग योजना' के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक सहायता एवं पंजीकरण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी उपस्थित लोगों को दी गई तथा अधिक से अधिक परिवारों को योजना से जोड़ने का आग्रह किया गया।
✅ संस्कृति एवं इतिहास संरक्षण पर विशेष बल:-
अगरिया जनजाति की गौरवशाली लौह प्रगलन परंपरा, इतिहास, धार्मिक मान्यताओं एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
🎉 अगरिया जनजाति गौरव दिवस की तैयारी पर चर्चा:-
बैठक में आगामी 15 नवंबर को आयोजित होने वाले अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन स्थापना दिवस) की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि अधिक से अधिक सामाजिक बंधुओं, युवाओं एवं मातृशक्तियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक एवं सफल बनाया जा सके।
🤝 संस्था को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर सहमति:-
फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों को निरंतर गति देने के लिए सभी सदस्यों से अपनी आय का एक छोटा-सा अंशदान संस्था को देने का आग्रह किया गया। सभी ने संस्था को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाने के लिए सहयोग करने की सहमति व्यक्त की।
🌳 वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान:-
बैठक में प्रतिवर्ष फाउंडेशन द्वारा आयोजित वृक्षारोपण अभियान में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने का निर्णय लिया गया।
📚 शिक्षा को बनाया गया सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक में कहा गया:—

"शिक्षा ही समाज के विकास की सबसे मजबूत सीढ़ी है।"
फाउंडेशन द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को स्कूल फीस, कॉपी, पुस्तक, बस्ता एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने, साथ ही मेधावी छात्र सम्मान एवं पुरस्कार योजना की जानकारी दी गई।
सभी अभिभावकों से अपील की गई कि समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे तथा घरेलू कार्यों के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुकने दी जाए।
🏹 बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का आह्वान:-
कार्यक्रम में कहा गया कि समाज के प्रत्येक बच्चे को अगरिया जनजाति के इतिहास, वैज्ञानिक लौह प्रगलन परंपरा, संस्कृति एवं गौरवशाली विरासत की जानकारी दी जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान पर गर्व कर सकें और समाज की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ा सकें।
🛕 धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का संदेश:-
बैठक में समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने पर भी विशेष चर्चा हुई। उपस्थित सदस्यों से अपनी परंपराओं, संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों का सम्मान करने तथा समाज की एकता बनाए रखने का आह्वान किया गया।
👥 अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही सहभागिता:-
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार अगरिया के साथ महिपाल अगरिया, सुरेश अगरिया, गोरेलाल अगरिया, रघुनाथ अगरिया, ठाकुर अगरिया, अर्थलाल अगरिया सहित बड़ी संख्या में जिला कार्यकर्ता, वरिष्ठजन, युवा साथी एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर श्री राजकुमार अगरिया ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं उपस्थित समाजबंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—
"संगठित समाज ही विकसित समाज की पहचान है। यदि हम सभी मिलकर शिक्षा, संगठन, संस्कृति और समाज सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित ही अगरिया समाज नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।"
निष्कर्ष
ग्राम ककरसिहा में आयोजित यह अगरिया समाज जिला विकास अभियान केवल एक बैठक नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित, संगठित, आत्मनिर्भर, नशामुक्त एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम में लिए गए संकल्प आने वाले समय में अगरिया समाज के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रखेंगे।
🚩 जय अगरिया • जय लोहासुर • जय अंगारमोती माता 🚩
लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन
"होगा सबका साथ, तभी होगा समाज का विकास।"

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद एवं गोरकु गोत्र की कहानी

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद  एवं गोरकु   गोत्र की कहानी एवं इससे जुड़े कुछ किवदंती को आइये जानने का प्रयास करते है। जो अगरिया जनजाति  के  गोत्र  है।  किवदंतियो को पूर्व में कई इतिहास कारो द्वारा लेख किया गया है जिसको आज मै  पुनः आप सभी के समक्ष रखने का  हु। तो आइये जानते है -  लोगुंडी राजा के पास बहुत सारे पालतू जानवर थे। उनके पास एक जोड़ी केरकेटा पक्षी ,एक जोड़ी जंगली कुत्ते तथा एक जोड़ी बाघ थे। एक दिन जंगली कुत्तो से एक लड़का और लड़की पैदा हुए। शेरो ने भी एक लड़का और लड़की को  जन्म दिया। केरकेटा पक्षी के जोड़ो ने दो अंडे सेये और  उनमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। एक दिन लोगुंडि राजा मछली का शिकार करने गया तथा उन्हें एक ईल मछली मिली और वे उसे घर ले आये। उस मछली को पकाने से पहले उन्होंने उसे काटा तो उसमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। उसके कुछ दिनों बाद सारे पालतू जानवर मर गए सिर्फ उनके बच्चे बचे। उन बच्चो को केरकेता ,बघेल, सोनवानी तथा अइंद गोत्र  जो क्रमश पक्षी ,बाघ ,जंगली कुत्ते ,तथा ईल मछली से पैदा  हुए ...

मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी

  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी  1 -अगरिया जनजाति की मध्य प्रदेश में जनसँख्या-  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसँख्या लगभग 41243 है जो प्रदेश की कुल जनसँख्या का 0.057  प्रतिशत है।   2 -अगरिया निवास क्षेत्र -अगरिया वैसे मध्यप्रदेश के कई जिलों में पाए जाते है पर मुख्यतः अधिक संख्या में अनूपपुर ,शहडोल उमरिया ,कटनी ,मंडला ,बालाघाट ,सीधी ,सिंगरौली में मुख्यतः पाए जाते है।  3 -अगरिया गोत्र -अगरिया जनजाति में कुल 89 गोत्र पाए जाते है। (सम्पूर्ण गोत्र की जानकारी के लिए यू ट्यूब पर अगरिया समाज संगठन भारत सर्च करे और विडिओ देखे )(विडिओ देखने के लिए लिंक पर क्लीक करे - https://youtu.be/D5RSMaLql1M   )जिनमे से कुछ  प्रमुख गोत्र है सोनवानी ,अहिंद ,धुर्वे ,मरकाम ,टेकाम ,चिरई ,नाग ,तिलाम ,उइके,बघेल  आदि है प्रत्येक गोत्र में टोटम पाए जाते है। एवं अगरिया जनजाति का प्रत्येक गोत्र प्राकृतिक से लिया गया है अर्थात पेड़ पौधे ,जीव जंतु से ही लिया गया है। उदाहरण के लिए जैसे बघेल गोत्र बाघ से लिया गया है।  4-...

अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति (Origin of Agariya tribal community: -)

  अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति :- कोरबा के अगरिया 👇👇👇👇👇  अब हम एक महत्वपूर्ण और कठिन समस्या की और ध्यान देते है की वास्तव में ये अगरिया कौन है क्या  ही आदिवासी है ,क्या वैसे आदिवासी है जैसे होने चाहिए ,अपने आप में जो पहले ही अस्त्तिव में आ गए थे।  संभवतः लोहे की खोज या जानकारी के समय या सेन्ट्रल प्राविन्स में लोहे  की जानकारी प्राप्त होने के समय ,अथवा क्या वे साधारण तौर पर अनेक विभिन्न आदिवासी समूहों के सदस्यों का जमावड़ा है ,जिन्होंने लोहा गलाने का काम चुन लिया है. क्या डिंडोरी मंडला अनूपपुर शहडोल सीधी  सिंगरौली के अगरिया वही अगरिया है जो गोंडो की एक शाखा है जिन्होंने लोहे का काम करना शुरू कर दिया है।  और इसलिए धीरे धीरे वे एक विशेष समुदाय के रूप में अलग हो गए है। बिलासपुर के चोख अगरिया कोरबा उपजाति से बहुत मिलते जुलते है ,क्या वे कोरबा छत्तीसगढ़ जनजाति का ही एक अलग वर्ग है जिन्होंने लोहा गलाने का काम सुरु कर  दिया है।  हम भारत के कुछ अन्य जगह के समस्याओं को रख कर बात कर सकते है। रिसले ने बताया है की बिहार तथा पशिचम बंगाल के  लो...