विक्रमपुर (डिंडोरी) मे दिनांक - 24.05.2026 को अगरिया समाज जोड़ो अभियान अंतर्गत एजेंडा वाचन एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे ll सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अगरिया जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर 2026)

🌿🔥 जब होगा सबका साथ, तभी होगा समाज का विकास 🔥🌿 जय अगरिया 🚩 जय लोहासुर 🔥 जय अंगार मोती 🙏 आइये मिलकर बढ़ायें एक कदम समाज की ओर… 🏹 15 नवम्बर 2026 🏹 अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन 7वाँ स्थापना दिवस) अगरिया जनजाति का गौरव केवल हमारे इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, मेहनत, स्वाभिमान और वैज्ञानिक विरासत में जीवित है। हमारी पहचान उस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है, जिसमें हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों के ज्ञान के आधार पर लौह प्रगलन तकनीक जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी परंपरा को विकसित किया और आगे बढ़ाया। इसी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और पहचान को सम्मान देने के लिए 15 नवम्बर 2026 को कोतमा में अगरिया जनजाति गौरव दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाएगा। यह अवसर लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के 7वें स्थापना दिवस का भी गौरवपूर्ण अवसर है। ✨ यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है… यह हमारी पहचान को याद करने का दिन है। यह हमारी विरासत पर गर्व करने का दिन है। यह अपनी संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दिन है। यह समाज के हर वर...

विक्रमपुर (डिंडोरी) मे दिनांक - 24.05.2026 को अगरिया समाज जोड़ो अभियान अंतर्गत एजेंडा वाचन एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे ll

लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे जिला डिंडोरी के ग्राम - विक्रमपुर मे दिनांक 24/05/2026 को अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम संपन्न हुआ ll जिला इकाई डिंडोरी मध्यप्रदेश अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम के लिए नियुक्त नोडल श्री उबरन अगरिया, श्री चूड़ामणि अगरिया, श्री जीवन अगरिया, श्री सागर अगरिया एवं रामदयाल अगरिया तथा उनकी 16 सदस्यों की टीम की उपस्थिति मे कार्यक्रम संपन्न हुआ ll
श्री उबरन अगरिया ज़ी के द्वारा अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास मे फाउंडेशन द्वारा चलाये जा रहे फाउंडेशन के 26 बिन्दुओ का वाचन करते हुए समस्त जिला डिंडोरी वासियो को फाउंडेशन के विचार धारा मे एक विचार धारा मे संगठित होने का सन्देश दिया गया ll 
अगरिया जनजाति समाज एवं समाज की संस्कृति का संरक्षण का सन्देश देते हुए उन्होंने बताया की अपने समाज एवं अपने संस्कृति का सम्मान करना हम सभी का धर्म है हमें अपने अंतिम सांस तक अपने समाज की वैज्ञानिक संस्कृति एवं इतिहास को संरक्षण करते हुए पालन करना होगा क्योंकि अगरिया जनजाति समाज जिसने सबसे पहले लौह अयस्क की पहचान किया तथा पारम्परिक तकनीक से लौह अयस्क को अपनी पारम्परिक भट्ठी मे गलाकार लोहा बनाया यानि लोहा की खोज करने वाली, लोहा को जन्म देने वाली संस्कृति का जन्म दाता अगरिया जनजाति है इसलिए अपने समाज की संस्कृति का सम्मान करना पालन करना हमारे लिए गर्व का विषय है ll तथा कोई भी समाज मे धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे ll समाज मे शिक्षा का प्रचार प्रसार एवं शिक्षा को बढ़ावा दिया जायेगा, फाउंडेशन द्वारा पढ़ने वाले छात्रों को फीस कॉपी बस्ता पुस्तक मे मदद किया जाता है इसलिए सभी बच्चों को को पढ़ाये,किसी भी छात्र की पढ़ाई फीस कॉपी बस्ता पुस्तक की वजह से ना रुके ये हम सभी को ध्यान देना होगा ll आज हमारा समाज शिक्षा व्यवसाय, नौकरी,सामाजिक रहन सहन चारो स्तर से पिछड़ा है यदि समाज को बेहतर सशक्त और मजबूत बनाना है तो हम सभी को फाउंडेशन के साथ मिलकर समाज के इन चारो बिन्दुओ पर काम करना होगा तभी समाज हमारा विकास करेगा ll
समाज के हर व्यक्ति को सामाजिक भावना अपने अंदर जागृत करना होगा अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा, समाज से रूढ़िवादी प्रथाओ को समाप्त करना होगा, समाज मे ऐसे नियम लाने होंगे जिससे समाज को और समाज के व्यक्ति को फायदा हो जिससे समाज सशक्त और मजबूत बन सके ll 
अगरिया जनजाति समाज की आज की स्थिति को ध्यान देते हुए लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन पूरे भारत मे समाज  को जिलों जिलों राज्यों राज्यों मे संगठित कर रहा है हम सभी को फाउंडेशन की विचार धारा का सम्मान करना है और फाउंडेशन से जुड़ना है और फाउंडेशन द्वारा समाज के उत्थान विकास के लिए जा रहे सुझावों को जिलों मे लागू करना है ll बताया गया की समाज मे नशा पान, एवं नशे का लेन देन एक ऐसा रूढ़िवादी प्रथा है जो समाज को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, समाज की किसी भी सामाजिक कार्यक्रम जैसे बरहो, दशगात्र, शादी व्याह मे नशा पान करके बैठना, नशा का लेन देन करना ये बहुत गलत है, क्योंकि ऐसे करने से समाज मे युवाओं मे नशा पान की लत बढ़ती है और ये लत पूरे समाज को खोखला कर रही है समाज मे नशा पान के लेन देन से ये नशा पान पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती जाती है और समाज खोखला कमजोर होता जा रहा है ll फाउंडेशन के अनुसार हम सभी को समाज मे नशा पान की प्रथा को समाप्त करना होगा तभी बच्चों मे विकास मे होगा तभी समाज मे शिक्षा, सभ्यता, संस्कार आएंगे इसलिए आइये मिलकर फाउंडेशन के साथ एक कदम समाज की ओर बढ़ाये और समाज को बेहतर दिशा की ओर लेकर चले ll 
हमारे समाज के युवा, बच्चे समाज के भविष्य है  इनको सही दिशा मे लेकर जाए जिससे अगरिया जनजाति समाज की एक बेहतर भावी पीढ़ी का निर्माण हो सके ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन का लक्ष्य संगठित, सशक्त, शिक्षित एवं नशा मुक्त समाज का निर्माण लक्ष्य है जिसे हम सभी को अपनाना होगा तभी समाज विकास करेगा ll लौह प्रगलक फाउंडेशन आज समाज मे मेधावी छात्र सम्मान भी देता है यदि समाज मे कोई बालक या बालिका 85% से ऊपर का रिजल्ट लाते है उन बच्चो को अच्छे पुरस्कार के साथ फाउंडेशन के स्थापना दिवस 15 नवंबर (अगरिया जनजाति गौरव दिवस) को बच्चों के साथ माता पिता को भी सम्मानित किया जाता है ll फाउंडेशन द्वारा समाज के उत्थान विकास मे चलाये जा रहे मुहीम को जिलों जिलों राज्यों राज्यों मे पहुंचाने के लिए जिलों मे जिलाध्यक्ष एवं कार्यकर्त्ताओं की नियुक्ति की गयी है जो जिलाध्यक्ष या जो कार्यकर्त्ता बेहतर और अच्छे कार्य करते है उन जिलों के जिलाध्यक्ष एवं कार्यकर्त्ताओं को मंच मे पुरस्कार के साथ सम्मानित किया जाता है ll 
आज लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन समाज के हर क्षेत्र मे काम कर रहा है प्रोत्साहन दे रहा है केवल हम सभी को फाउंडेशन द्वारा सुझाये मार्ग पर चलना है ll हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है हमारा समाज हमारा गौरव है हमको संगठित होना है और मिलकर सभी को बेहतर समाज के लिए आगे बढ़ना है ll
उपरोक्त सभी 26 बिन्दुओ पर श्री उबरन अगरिया ज़ी के द्वारा फाउंडेशन के एजेंडा की जानकारी दी गयी और फाउंडेशन से जुड़कर समाज के उत्थान विकास मे कार्य करने का सुझाव दिया गया ll
कार्यक्रम के अंतिम चरण मे श्री चूड़ामणि अगरिया, सागर अगरिया, जीवन अगरिया नोडल द्वारा फाउंडेशन की ओर से शपथ ग्रहण कराया गया और सभा का समापन किया गया ll
 जिला डिंडोरी कार्यक्रम जिला आयोजन समिति की ओर से श्री कमलेश मरावी, मनीष मरावी, श्रीलाल मरावी एवं अन्य स्वजातीय बंधु कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे और लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के तत्वावधान मे जिला डिंडोरी के ग्राम विक्रमपुर मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ ll

फाउंडेशन के गतिविधि को यू ट्यूब एवं फेसबुक पर देखने के लिए सर्च करे अगरिया समाज संगठन भारत और चैनल को सब्सक्राइब करके देखे ll

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद एवं गोरकु गोत्र की कहानी

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद  एवं गोरकु   गोत्र की कहानी एवं इससे जुड़े कुछ किवदंती को आइये जानने का प्रयास करते है। जो अगरिया जनजाति  के  गोत्र  है।  किवदंतियो को पूर्व में कई इतिहास कारो द्वारा लेख किया गया है जिसको आज मै  पुनः आप सभी के समक्ष रखने का  हु। तो आइये जानते है -  लोगुंडी राजा के पास बहुत सारे पालतू जानवर थे। उनके पास एक जोड़ी केरकेटा पक्षी ,एक जोड़ी जंगली कुत्ते तथा एक जोड़ी बाघ थे। एक दिन जंगली कुत्तो से एक लड़का और लड़की पैदा हुए। शेरो ने भी एक लड़का और लड़की को  जन्म दिया। केरकेटा पक्षी के जोड़ो ने दो अंडे सेये और  उनमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। एक दिन लोगुंडि राजा मछली का शिकार करने गया तथा उन्हें एक ईल मछली मिली और वे उसे घर ले आये। उस मछली को पकाने से पहले उन्होंने उसे काटा तो उसमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। उसके कुछ दिनों बाद सारे पालतू जानवर मर गए सिर्फ उनके बच्चे बचे। उन बच्चो को केरकेता ,बघेल, सोनवानी तथा अइंद गोत्र  जो क्रमश पक्षी ,बाघ ,जंगली कुत्ते ,तथा ईल मछली से पैदा  हुए ...

मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी

  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी  1 -अगरिया जनजाति की मध्य प्रदेश में जनसँख्या-  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसँख्या लगभग 41243 है जो प्रदेश की कुल जनसँख्या का 0.057  प्रतिशत है।   2 -अगरिया निवास क्षेत्र -अगरिया वैसे मध्यप्रदेश के कई जिलों में पाए जाते है पर मुख्यतः अधिक संख्या में अनूपपुर ,शहडोल उमरिया ,कटनी ,मंडला ,बालाघाट ,सीधी ,सिंगरौली में मुख्यतः पाए जाते है।  3 -अगरिया गोत्र -अगरिया जनजाति में कुल 89 गोत्र पाए जाते है। (सम्पूर्ण गोत्र की जानकारी के लिए यू ट्यूब पर अगरिया समाज संगठन भारत सर्च करे और विडिओ देखे )(विडिओ देखने के लिए लिंक पर क्लीक करे - https://youtu.be/D5RSMaLql1M   )जिनमे से कुछ  प्रमुख गोत्र है सोनवानी ,अहिंद ,धुर्वे ,मरकाम ,टेकाम ,चिरई ,नाग ,तिलाम ,उइके,बघेल  आदि है प्रत्येक गोत्र में टोटम पाए जाते है। एवं अगरिया जनजाति का प्रत्येक गोत्र प्राकृतिक से लिया गया है अर्थात पेड़ पौधे ,जीव जंतु से ही लिया गया है। उदाहरण के लिए जैसे बघेल गोत्र बाघ से लिया गया है।  4-...

अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति (Origin of Agariya tribal community: -)

  अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति :- कोरबा के अगरिया 👇👇👇👇👇  अब हम एक महत्वपूर्ण और कठिन समस्या की और ध्यान देते है की वास्तव में ये अगरिया कौन है क्या  ही आदिवासी है ,क्या वैसे आदिवासी है जैसे होने चाहिए ,अपने आप में जो पहले ही अस्त्तिव में आ गए थे।  संभवतः लोहे की खोज या जानकारी के समय या सेन्ट्रल प्राविन्स में लोहे  की जानकारी प्राप्त होने के समय ,अथवा क्या वे साधारण तौर पर अनेक विभिन्न आदिवासी समूहों के सदस्यों का जमावड़ा है ,जिन्होंने लोहा गलाने का काम चुन लिया है. क्या डिंडोरी मंडला अनूपपुर शहडोल सीधी  सिंगरौली के अगरिया वही अगरिया है जो गोंडो की एक शाखा है जिन्होंने लोहे का काम करना शुरू कर दिया है।  और इसलिए धीरे धीरे वे एक विशेष समुदाय के रूप में अलग हो गए है। बिलासपुर के चोख अगरिया कोरबा उपजाति से बहुत मिलते जुलते है ,क्या वे कोरबा छत्तीसगढ़ जनजाति का ही एक अलग वर्ग है जिन्होंने लोहा गलाने का काम सुरु कर  दिया है।  हम भारत के कुछ अन्य जगह के समस्याओं को रख कर बात कर सकते है। रिसले ने बताया है की बिहार तथा पशिचम बंगाल के  लो...