💥 राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया जनजाति का उनसे क्या संबंध है? (विस्तृत जानकारी)💥 राजा लौहगुंडी:👉अगरिया जनजाति की लोकपरंपरा के नायक अगरिया जनजाति की मौखिक परंपराओं, लोककथाओं और धार्मिक विश्वासों में राजा लौहगुंडी (लोगुंडी राजा) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उन्हें लौह-विद्या के संरक्षक, महान शासक और अगरिया समाज के आदर्श पूर्वज के रूप में याद किया जाता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि राजा लौहगुंडी से संबंधित अधिकांश विवरण लोककथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें समुदाय की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा माना जाता है, न कि सभी प्रसंगों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य। 1. राजा लौहगुंडी कौन थे? अगरिया समाज की मान्यता के अनुसार राजा लौहगुंडी एक शक्तिशाली असुर राजा थे। उनका राज्य लोहागुंडी (या लोहरीपुर) कहलाता था, जिसे लौह-कला, धातु विज्ञान और समृद्धि का केंद्र माना जाता है। लोककथाओं में इस राज्य का वर्णन एक ऐसी नगरी के रूप में मिलता है जहाँ लोहे के उपयोग और निर्माण की अद्भुत परंपरा विकसित थी। समाज की धार्मिक मान्यताओं में उन्हें लोहासुर से जुड़ा हुआ...
अगरिया जनजाति के प्रमुख औजार
संसी Sansi-लोहा या किसी भी वस्तु को पकड़ा जाता है और हथोड़ा से पीटा जाता है
2 -हथौड़ा या हथौड़ी -हथौड़ा से पीटा जाता है किसी भी लोहे की वस्तु या किसी भी सामग्री को। तथा आकार दिया जाता है।
3 -घन या घान -लोहे की बड़ी वस्तु को आकार देने के लिए घन से पीटा जाता है
4 -छेनी -छेनी का प्रयोग लोहा ,लोहे के सामान या किसी अन्य वस्तु को काटने में किया जाता है। 5-निहाई -लोहे को निहाई में रख कर पीटा जाता है।
8 -पवारी -कोई भी घरेलु उपयोग के लोहे की सामग्री या कृषि यंत्र सामग्री में हत्था लगाने हेतु होल या छेद बनाने के काम में आता है
9 -सुम्मी या सुमि -घरेलु उपयोग की सामग्री या कोई औजार या कोई अन्य लोहे के कृषि यंत्र में छोटे छोटे छेद बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
10 -चपरास -लोहे की सामग्री के कोनो में सुधार हेतु चपरास का उपयोग अगरिया जनजाति करता है।


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agariya samaj ki jankari ke liye ye blog taiyar kiya gaya hai agariya samaj sangathan poore bharat ke agariya samaj ko sangathit karna chahta hai