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अगरिया जनजाति से जुड़ी ख़ास बाते एवं उनका रहन सहन

अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...

अगरिया समुदाय

अगरिया आदिवासी के बारे मे ll 👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽 यह तस्वीर अगरिया समुदाय के पारम्परिक तरीके से लोहा गलाने की प्रक्रिया को दर्शाती है। इसमें एक मिट्टी और पत्थर से बना भट्ठा है, जिसमें जलता हुआ कोयला और चमकता हुआ पिघला हुआ लोहा दिखाई दे रहा है। चार लोग इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं—एक महिला धौंकनी (bellows) चला रही है, एक व्यक्ति पिघले हुए लोहे को छड़ से नियंत्रित कर रहा है, और अन्य लोग प्रक्रिया को देख रहे हैं। उनके कपड़े पारंपरिक और रंगीन हैं, जो ग्रामीण परिवेश को जीवंत बनाते हैं। अगरिया जनजाति का इतिहास यही है जो पूर्व काल मे जंगल मे निवास करते करते अपने जीवन यापन के लिए लौह अयस्क (लौह पत्थर) से अपने पारम्परिक पद्धति से कोठी और भट्ठी से लोहा बनाया ll इस दुनिया मे सबसे पहले लोहा बनाने की संस्कृति को जन्म देने वाली जनजाति अगरिया जनजाति है ll आज इस संस्कृति को अपना कर कई कंपनी लोहा का उत्पादन कर रहे है ll अगरिया जनजाति आज के इस आधुनिक समाज मे भी एक पिछड़ा हुआ आदिवासी समाज है ll मध्यप्रदेश शासन एवं भारत सरकार को अगरिया जनजाति समाज को बेहतर स्थिति मे लाने के ल...

अगरिया जनजाति समाज के दस्तावेज मे हुए त्रुटि सुधार को लेकर ज्ञापन सौपे एवं अगरिया जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल करने की मांग पर, तथा अगरिया जनजाति के संरक्षण पर ज्ञापन सौपे ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन ज़िला इकाई रायगढ़ की टीम ll

लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन ज़िला इकाई रायगढ़ छत्तीसगढ़ की टीम ने आज दिनांक 04/03/2025 को ज़िला कलेक्टर कार्यालय जाकर अगरिया जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल किये जाने एवं अगरिया जनजाति के संरक्षण एवं अगरिया जनजाति समाज के दस्तावेज मे हुए त्रुटि मे सुधार हेतु ज्ञापन सौपा गया ll  अगरिया जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज मे शामिल किये जाने  :- को लेकर बताया गया की  अगरिया जनजाति समाज आज के इस आधुनिक परिवेश मे सबसे पिछड़ा समाज है सरकार द्वारा जिन जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज(PVGT) का दर्जा दिया गया है उन जनजाति समाज से भी अति पिछड़ा समाज अगरिया जनजाति समाज है, शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी तथा सामाजिक रहन सहन मे अगरिया जनजाति समाज पिछड़ा समाज है ll आज इस अगरिया जनजाति समाज को भारत सरकार,राज्य सरकार के संरक्षण एवं आशीर्वाद की आवश्यकता है इस जनजाति समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है ll अगरिया जनजाति समाज का मानना है की सरकार अगरिया जनजाति समाज का सर्वे ले (शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी सामाजिक रहन सहन को आधार मानकर) उस स्थिति मे यदिl lअगरिया समाज अन्...