ज़िला बलरामपुर मे 5जून विश्व पर्यावरण दिवस पर जागेराम अगरिया जी द्वारा वृक्षारोपण अगरिया समाज संगठन भारत के मार्गदर्शन मेll सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अगरिया जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर 2026)

🌿🔥 जब होगा सबका साथ, तभी होगा समाज का विकास 🔥🌿 जय अगरिया 🚩 जय लोहासुर 🔥 जय अंगार मोती 🙏 आइये मिलकर बढ़ायें एक कदम समाज की ओर… 🏹 15 नवम्बर 2026 🏹 अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन 7वाँ स्थापना दिवस) अगरिया जनजाति का गौरव केवल हमारे इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, मेहनत, स्वाभिमान और वैज्ञानिक विरासत में जीवित है। हमारी पहचान उस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी है, जिसमें हमारे पूर्वजों ने प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों के ज्ञान के आधार पर लौह प्रगलन तकनीक जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी परंपरा को विकसित किया और आगे बढ़ाया। इसी गौरवशाली विरासत, संस्कृति और पहचान को सम्मान देने के लिए 15 नवम्बर 2026 को कोतमा में अगरिया जनजाति गौरव दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाएगा। यह अवसर लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के 7वें स्थापना दिवस का भी गौरवपूर्ण अवसर है। ✨ यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है… यह हमारी पहचान को याद करने का दिन है। यह हमारी विरासत पर गर्व करने का दिन है। यह अपनी संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का दिन है। यह समाज के हर वर...

ज़िला बलरामपुर मे 5जून विश्व पर्यावरण दिवस पर जागेराम अगरिया जी द्वारा वृक्षारोपण अगरिया समाज संगठन भारत के मार्गदर्शन मेll

राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के मार्गदर्शन पर 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर संगठन अंतर्गत सभी जिलों मे वृक्षारोपण का कार्यक्रम किया जाहा ज़िला बलरामपुर की ओर से श्री जागेराम अगरिया जी जो की संगठन के बहुत ही समर्पित कार्यकर्त्ता है ll और समाज को एक राष्ट्रीय पहचान दिलाने मे अच्छी सकारात्मक विचार रखने वाले है ll इनसे बात करने पर कहना है की समाज हमारा है हम इस समाज मे पैदा हुए तो इस समाज के लिए जिम्मेदारी लेना हमारा कर्तव्य है ll असल मे व्यक्ति तो वह है जो अपने लिए नहीं दुसरो के लिए जीता है और समाज को एक अच्छे दिशा मे लेकर जाता है ll सर का कहना है की संगठन को हमको मजबूत बनाना होगा इसको प्राथमिकता देना होगा तभी हमारा समाज आगे जायगा समाज मे विकास होगा, समाज मे शिक्षा होगा, यदि संगठन के माध्यम से हम जागरूकता नहीं लायेगे सभी एक साथ मिलकर, तो समाज हमारा विकास नहीं करेगा ll आज जो भी समाज के भईया बहिनी इधर उधर बिखरे है उनको एक साथ मिलकर कार्य करना होगा समाज को जागरूक करना होगा ll ज़ब समाज विकास करेगा तभी हमारे देश का विकास होगा ll देश के विकास मे समाज की अहम भूमिका होती है इसलिए अपने समाज को अच्छा संस्कारी शिक्षित समाज बनाने के लिए, आगे आना होगा ll
उन्होंने अगरिया जनजाति को लेकर कहा की आज अगरिया जनजाति के अस्तित्व लगातार खतरे मे है ll लोग अपने नाम के आगे अगरिया लिख नहीं रहे है यदि ऐसा ही चलता रहा तो समाज का अस्तित्व भी खतरे मे मे चला जायगा ll इस समाज मे कई समस्याएं है चाहे दस्तावेज की बात करें या, सर्टिफिकेट ll क्योंकि हमने कभी भी अपने समाज को वास्तविक रुप से सामने लाया ही नहीं हम कहते तो है की अगरिया है हम. लेकिन हमारा पहचान पत्र जिससे हमारी पहचान है उसमे अगरिया है ही नहीं ll तो मौखिक रुप से कैसे आप इस जनजाति के व्यक्ति के रुप मे जाने जा सकेंगे  उन्होंने कहा की सभी संगठन की विचार धारा का सम्मान करें एवं संगठित होकर संगठित समाज का निर्माण करें जिससे अगरिया जनजाति की पहचान स्थापित हो सके ll साथ मे उन्होंने कहा की अगरिया समाज संगठन सदैव देश हित एवं सार्वजानिक कार्य मे आगे है और रहेगा प्रति वर्ष संगठन द्वारा वृक्षारोपण होगा और हम सब मिलकर समाज को आगे लेकर जाने के लिए संगठित समाज का निर्माण करेंगे ll


#agariyasamajvriksharopan2022

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद एवं गोरकु गोत्र की कहानी

सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद  एवं गोरकु   गोत्र की कहानी एवं इससे जुड़े कुछ किवदंती को आइये जानने का प्रयास करते है। जो अगरिया जनजाति  के  गोत्र  है।  किवदंतियो को पूर्व में कई इतिहास कारो द्वारा लेख किया गया है जिसको आज मै  पुनः आप सभी के समक्ष रखने का  हु। तो आइये जानते है -  लोगुंडी राजा के पास बहुत सारे पालतू जानवर थे। उनके पास एक जोड़ी केरकेटा पक्षी ,एक जोड़ी जंगली कुत्ते तथा एक जोड़ी बाघ थे। एक दिन जंगली कुत्तो से एक लड़का और लड़की पैदा हुए। शेरो ने भी एक लड़का और लड़की को  जन्म दिया। केरकेटा पक्षी के जोड़ो ने दो अंडे सेये और  उनमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। एक दिन लोगुंडि राजा मछली का शिकार करने गया तथा उन्हें एक ईल मछली मिली और वे उसे घर ले आये। उस मछली को पकाने से पहले उन्होंने उसे काटा तो उसमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। उसके कुछ दिनों बाद सारे पालतू जानवर मर गए सिर्फ उनके बच्चे बचे। उन बच्चो को केरकेता ,बघेल, सोनवानी तथा अइंद गोत्र  जो क्रमश पक्षी ,बाघ ,जंगली कुत्ते ,तथा ईल मछली से पैदा  हुए ...

मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी

  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति एवं अगरिया जनजाति के बारे में जानकारी  1 -अगरिया जनजाति की मध्य प्रदेश में जनसँख्या-  मध्य प्रदेश में अगरिया जनजाति की जनसँख्या लगभग 41243 है जो प्रदेश की कुल जनसँख्या का 0.057  प्रतिशत है।   2 -अगरिया निवास क्षेत्र -अगरिया वैसे मध्यप्रदेश के कई जिलों में पाए जाते है पर मुख्यतः अधिक संख्या में अनूपपुर ,शहडोल उमरिया ,कटनी ,मंडला ,बालाघाट ,सीधी ,सिंगरौली में मुख्यतः पाए जाते है।  3 -अगरिया गोत्र -अगरिया जनजाति में कुल 89 गोत्र पाए जाते है। (सम्पूर्ण गोत्र की जानकारी के लिए यू ट्यूब पर अगरिया समाज संगठन भारत सर्च करे और विडिओ देखे )(विडिओ देखने के लिए लिंक पर क्लीक करे - https://youtu.be/D5RSMaLql1M   )जिनमे से कुछ  प्रमुख गोत्र है सोनवानी ,अहिंद ,धुर्वे ,मरकाम ,टेकाम ,चिरई ,नाग ,तिलाम ,उइके,बघेल  आदि है प्रत्येक गोत्र में टोटम पाए जाते है। एवं अगरिया जनजाति का प्रत्येक गोत्र प्राकृतिक से लिया गया है अर्थात पेड़ पौधे ,जीव जंतु से ही लिया गया है। उदाहरण के लिए जैसे बघेल गोत्र बाघ से लिया गया है।  4-...

अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति (Origin of Agariya tribal community: -)

  अगरिया आदिवासी समुदाय की उत्पत्ति :- कोरबा के अगरिया 👇👇👇👇👇  अब हम एक महत्वपूर्ण और कठिन समस्या की और ध्यान देते है की वास्तव में ये अगरिया कौन है क्या  ही आदिवासी है ,क्या वैसे आदिवासी है जैसे होने चाहिए ,अपने आप में जो पहले ही अस्त्तिव में आ गए थे।  संभवतः लोहे की खोज या जानकारी के समय या सेन्ट्रल प्राविन्स में लोहे  की जानकारी प्राप्त होने के समय ,अथवा क्या वे साधारण तौर पर अनेक विभिन्न आदिवासी समूहों के सदस्यों का जमावड़ा है ,जिन्होंने लोहा गलाने का काम चुन लिया है. क्या डिंडोरी मंडला अनूपपुर शहडोल सीधी  सिंगरौली के अगरिया वही अगरिया है जो गोंडो की एक शाखा है जिन्होंने लोहे का काम करना शुरू कर दिया है।  और इसलिए धीरे धीरे वे एक विशेष समुदाय के रूप में अलग हो गए है। बिलासपुर के चोख अगरिया कोरबा उपजाति से बहुत मिलते जुलते है ,क्या वे कोरबा छत्तीसगढ़ जनजाति का ही एक अलग वर्ग है जिन्होंने लोहा गलाने का काम सुरु कर  दिया है।  हम भारत के कुछ अन्य जगह के समस्याओं को रख कर बात कर सकते है। रिसले ने बताया है की बिहार तथा पशिचम बंगाल के  लो...