मैनेजिंग डायरेक्टर अगरिया समाज कल्याण कोष योजना अगरिया जनजाति समाज के उत्थान विकास के लिए प्रमुख पहल है ll यह योजना (अगरिया समाज संगठन भारत) लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व मे आरम्भ किया गया है ll आइये जानते है मैनेजिंग डायरेक्टर अगरिया समाज कल्याण कोष योजना क्या है :- मैनेजिंग डायरेक्टर अगरिया समाज कल्याण कोष योजना अगरिया जनजाति समाज के लिए एक ऎसी योजना है जहाँ इस योजना अंतर्गत जुड़े किसी व्यक्ति के दिवंगत ( मृत) होने पर दिवंगत व्यक्ति के परिवार (नॉमिनी) को आर्थिक सहायता प्रदान किया जाता है ll इस योजना की शुरुआत लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन (अगरिया समाज संगठन भारत) के संस्थापक मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दशरथ प्रसाद अगरिया ज़ी के द्वारा किया गया है ll इस योजना के माध्यम से अगरिया जनजाति समाज को सहयोग प्रदान करना लक्ष्य है ll अक्सर देखा गया है की कुछ परिवार ऐसे है जहाँ मुखिया या किसी परिवार के सदस्य के दिवंगत हो जाने पर परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर हो जाता है यहाँ तक की दिवंगत सदस्य के क्रिया कर्म करने तक के लाले पड़ जाते है ll इन सारे बातो...
सोनवानी गोत्र ,केरकेता ,बघेल ,अइंद एवं गोरकु गोत्र की कहानी एवं इससे जुड़े कुछ किवदंती को आइये जानने का प्रयास करते है। जो अगरिया जनजाति के गोत्र है। किवदंतियो को पूर्व में कई इतिहास कारो द्वारा लेख किया गया है जिसको आज मै पुनः आप सभी के समक्ष रखने का हु। तो आइये जानते है - लोगुंडी राजा के पास बहुत सारे पालतू जानवर थे। उनके पास एक जोड़ी केरकेटा पक्षी ,एक जोड़ी जंगली कुत्ते तथा एक जोड़ी बाघ थे। एक दिन जंगली कुत्तो से एक लड़का और लड़की पैदा हुए। शेरो ने भी एक लड़का और लड़की को जन्म दिया। केरकेटा पक्षी के जोड़ो ने दो अंडे सेये और उनमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। एक दिन लोगुंडि राजा मछली का शिकार करने गया तथा उन्हें एक ईल मछली मिली और वे उसे घर ले आये। उस मछली को पकाने से पहले उन्होंने उसे काटा तो उसमे से भी एक लड़का और लड़की निकले। उसके कुछ दिनों बाद सारे पालतू जानवर मर गए सिर्फ उनके बच्चे बचे। उन बच्चो को केरकेता ,बघेल, सोनवानी तथा अइंद गोत्र जो क्रमश पक्षी ,बाघ ,जंगली कुत्ते ,तथा ईल मछली से पैदा हुए ...
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