अगरिया जनजाति भारत की एक विशिष्ट आदिवासी समुदाय है, जिसकी पहचान पारंपरिक लौह-प्रगलन कला, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रही है। अगरिया समाज की खास पहचान को समझने के लिए उसके इतिहास, रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, देवी-देवताओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक जीवन को जानना आवश्यक है। 1. अगरिया समाज की खास पहचान:- •लौह प्रगलन की परंपरा: अगरिया समुदाय के अनेक समूह ऐतिहासिक रूप से लौह अयस्क से लोहा तैयार करने की पारंपरिक तकनीक के लिए जाने जाते हैं। •मेहनत और कौशल: पारंपरिक भट्ठी बनाना, अयस्क की पहचान करना, धातु को गलाना और लोहे को उपयोगी रूप देना विशेष तकनीकी ज्ञान की मांग करता था। •प्रकृति से जुड़ाव : जंगल, पहाड़, मिट्टी, पत्थर, वनस्पतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक जीवन में महत्त्व रहा है। •सांस्कृतिक विरासत: लोकगीत, लोककथाएँ, पारंपरिक पूजा, सामुदायिक आयोजन और पीढ़ियों से चला आ रहा ज्ञान सामाजिक पहचान के महत्त्वपूर्ण अंग हैं। •सामुदायिक सहयोग: परिवार, रिश्तेदारी और समुदाय के लोगों के बीच सहयोग, मेल-मिलाप तथा सामूहिक कार्यक्रमों की परंपरा ...
ज़िला कोरबा छत्तीसगढ़ मे 5जून विश्व पर्यावरण दिवस पर अगरिया समाज संगठन भारत के नेतृत्व मे वृहद वृक्षारोपण का कार्यक्रम हुआ ll
राष्ट्रीय लौह प्रगलक अगरिया समाज महासंघ भारत के अनुसार संगठन अंतर्गत लगभग सभी जिलों के प्रत्येक ब्लॉक मे कम से कम 10 पौधों का रोपण किया जाना था जहाँ ये कार्यक्रम सभी जिलों मे संपन्न हुआ ll ये कार्यक्रम संगठन से जुडा ज़िला कोरबा मे भी संपन्न हुआ जहाँ कोरबा ज़िलाध्यक्ष दादा दिलहरण अगरिया जी के नेतृत्व मे वृक्षारोपण रोपण कार्यक्रम किया गया जहाँ कोरबा जिले के प्रत्येक ब्लॉक मे 10-10 पौधों का रोपण हुआ कोरबा ज़िला के करतला ब्लॉक से सबसे अधिक मात्रा मे वृक्षारोपण हुआ वहा से कार्यवाहक ब्लॉक अध्यक्ष श्री राकेश अगरिया जी एवं उनके पूरी टीम ने मिलकर 20 वृक्षारोपण किये जिनके नाम निम्नानुसार है-रोहित अगरिया आम , गुराबरीन अगरिया आम पौध,शिवा संकर अगरिया पपिता,मिनी अगरिया अमरूद ,जगरनाथ अगरिया अमरूद , गायत्री अगरिया जामुन इत्यादि वृक्षों का रोपण किया गया ll के साथ ही ज़िला कोरबा के सभी ब्लॉक से पौधरोपण हुआ ll कोरबा ज़िला के माननीय जिलाध्यक्ष महोदय दादा दिलहरण अगरिया जी ने वृक्षारोपण किये और सभी को...