रायगढ़ के गेरवानी में अगरिया समाज का जिला विकास अभियान कार्यक्रम संपन्न: समाज को सशक्त और नशामुक्त बनाने का संकल्प एवं फाउंडेशन के सभी गतिविधियों मे सक्रिय भागीदारी निभाने पर चर्चा ll रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के नेतृत्व में दिनांक 21 जून 2026 को जिला रायगढ़ के ग्राम गेरवानी में 'अगरिया समाज जिला विकास अभियान' कार्यक्रम का गरिमामयी संपादन हुआ। यह पूरा कार्यक्रम जिलाध्यक्ष उबरन अगरिया एवं उनकी पूरी टीम के कुशल मार्गदर्शन और रणनीतिक नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में फाउंडेशन के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने, जिले में इसकी गतिविधियों को और अधिक मजबूत बनाने तथा समाज के उत्थान के लिए कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष रणनीति तैयार की गई। 📌 इन मुख्य बिंदुओं पर हुआ गहन मंथन कार्यक्रम के दौरान समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े कई गंभीर और प्रगतिशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई: सक्रिय भागीदारी: फाउंडेशन की आगामी गतिविधियों जैसे अगरिया जनजाति गौरव दिवस (फाउंडेशन 7वा स्थ...
अगरिया जनजाति के पूर्व जनगणना आधारित कुछ आंकड़े वर्ष १८८१ में पूरे भारत वर्ष में अगरियो की संख्या 210918 मिली थी जिसमे सिर्फ 22957 मध्य प्रान्त में ही थे। निश्चित रूप से वे खेती करनेवाले अघरिया समुदायों के साथ भ्रमित हो गए। वर्ष 1891 में जब मध्यप्रांत में जनगणना कमिश्नर सर बेंजामिन राबर्टसन थे तो अगरियों की तीन वर्ग में गणना की गयी थी। गोंड आदिवाशियों के अंतर्गत अगरिया =0326 लोहार अगरिया =2380 लोहा बनाने वाले अगरिया =2470 अगर इन आंकड़ों की बात करे तो 414 गोंडी अगरिया तथा लोहा गलाने वाले अन्य 242 की संख्या को भी जोड़ा जाना चाहिए। वर्ष 1891 पूरे प्रदेश में (सेन्ट्रल प्रोविंस ) में जहा कुल 84112 लोहार थे उसमे से 3070 व्यक्तियों को लोहा गलाने व बनाने के धंधे में लगा हुआ बतलाया गया था। सागर ,जबलपुर तथा दमोह जिलों में कोंडा गोंड (१२७४) अगरिया और कही कही गोंड भी पाए जाते है। लोहार जाती में एक उपवर्ग था जो अगरिया कहलाता था जो मुख्य रूप से जबलपुर में पाए जाते थे। तथा सतपुड़ा जिलों में गोंडी लोहारो संख्या 4679 थी। ये द...